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24 घंटे में सिर्फ एक बार मरीजों को मिलती है खिचड़ी

Mon, 12 Mar 2018 11:10 PM IST
प्रतापगढ़ ब्यूरो
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 जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को खाना नहीं दिया जा रहा है। 24 घंटे में सिर्फ एक बार मरीजों को खिचड़ी दी जा रही है। इससे उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। जबकि अस्पताल में मरीजों के लिए अंडा, फल, दूध, ब्रेड और पौष्टिक भोजन के नाम पर प्रतिदिन हजारों रुपये का भुगतान हो रहा है।
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स्वतंत्र प्रभार स्वास्थ्य राज्यमंत्री के गृह जनपद के जिला अस्पताल में सुविधाओं का बुरा हाल है। मरीजों को नाश्ते में मिलने वाला फल या अंडे में से कुछ भी नहीं दिया जा रहा है। सलाद तो दूर मरीजों को 24 घंटे में महज एक बार खिचड़ी ही दी जाती है। ऐसे में मरीजों के तीमारदारों को उनके लिए होटल से खाना लाना पड़ रहा है। एक ओर चिकित्सक ही मरीजों को बाहर के खाद्य पदार्थ देने पर रोक लगाते हैं तो दूसरी ओर अस्पताल से उन्हें खाना भी मुहैया नहीं कराया जा रहा है।

मरीजों के नाश्ता और भोजन के नाम पर आने वाले बजट को स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ ही अफसर खुद हजम कर जा रहे हैं। किसी से इसकी शिकायत करने पर मरीजों को इलाज न करने या फिर रेफर करने की धमकी दी जाती है। मगर इस समस्या की ओर जिले के जनप्रतिनिधि तो दूर जिम्मेदार अफसर भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। शासन का निर्देश है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को सुबह नाश्ते में आधा लीटर दूध, ब्रेड, अंडा अथवा सीजनल एक फल दिया जाए।
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सुबह दस से 11 बजे के बीच में मेन्यू के मुताबिक, दाल, रोटी, सब्जी और सलाद दिया जाए। शाम सात से नौ बजे के बीच में दाल चावल, रोटी सब्जी के साथ ही सलाद दिया जाए। जिससे अस्पताल में भर्ती मरीजों को होटल का खाना न खाना पड़े। मगर इस ओर किसी का ध्यान नहीं पड़ रहा है। दूध और दिनभर में एक बार खिचड़ी देकर उनका पेट भरा जा रहा है।

मरीज बोले, सिर्फ दूध और तहरी देते हैं
अमेठी जनपद के रामदयाल पांडेय का पुरवा गांव की रहने वाली निर्मला पत्नी हौसला प्रसाद यादव का ऑपरेशन हुआ है। छह दिनों से अस्पताल में भर्ती है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से सुबह एक पैकेट दूध दिया जाता है। शाम सात से आठ बजे के बीच में तहरी दी जाती है। तहरी के साथ सलाद तो दूर जरूरत पड़ने पर नमक तक नहीं दिया जाता है।
कोहड़ौर के सूर्यगढ़ निवासी सुनीता द्विवेदी पत्नी पवन ने बताया कि पांच दिन पहले उनका ऑपरेशन हुआ था। सर्जिकल वार्ड में भर्ती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से किसी प्रकार का लाभ नहीं दिया जा रहा है। खानापूर्ति के लिए महज एक पैकेट दूध दिया जाता है। शाम को खिचड़ी न लेने वाले मरीजों को दो पैकेट दूध देकर कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेते हैं। घर दूर होने के कारण होटल से खाना मंगवाना पड़ता है।

सुलतानपुर जनपद के रामगंज गनीपुर निवासी पूजना का भी ऑपरेशन हुआ है। सात दिन से भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि मरीजों को बगैर क्रिम वाला दूध सुबह दिया जाता है। चिकित्सक दाल रोटी खाने के ेलिए कहते हैं। ऐसे में होटल से दाल रोटी मंगवानी पड़ती है। उसने बताया कि ऑपरेशन के दौरान ही चिकित्सक कह देते हैं कि खाना और नाश्ता के बारे में कोई पूछे तो यह जरूर बताना की सबकुछ मिल रहा है। न बताने पर रेफर कर दिया जाएगा।

रानीगंज के मिर्जापुर चौहारी निवासी नूर मोहम्मद मेडिकल वार्ड में भर्ती हैं। इनसे बात की गई तो बताया कि नाश्ता खाना कुछ भी मेडिकल वार्ड के मरीजों को नहीं दिया जाता है। मरीजों को घर से या फिर होटल से खाना मंगवाकर खाना होता है।

पट्टी के अमुवाही निवासी राम प्रसाद से बात की गई तो उन्होंने बताया कि दिन भर में मात्र एक पैकेट दूध मिलता है। उसे भी गर्म करवाने के लिए दुकानदार को पैसा देना पड़ता है। खाना तो दूर सही से इलाज भी चिकित्सक नहीं करते हैं। दिन भर में एक बार चिकित्सक आते हैं। नर्स खुद न आकर ट्रेनिंग करने वाली नर्स को भेजती हैं।

चिलबिला निवासी आशीष का बेटा दिव्यांश जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती है। आशीष से बात की गई तो उसने बताया कि तीन दिनों से भर्ती है। अस्पताल की ओर से कुछ भी नहीं मिलता है। समय-समय पर डाक्टर देखने आ जाएं, यही बड़ी बात है।

दो दिन पहले ही चार्ज लिया हूं। इसके बारे में अभी जानकारी नहीं थी। शासन के आदेशों का पालन कराया जाएगा। यदि आदेश होगा तो मरीजों को सुबह शाम-खाना के साथ नाश्ता और फल अथवा अंडा भी वितरण कराया जाएगा। इन दिनों वितरण करने वाले जिम्मेदार लोगों से इसके बारे में पूछताछ की जाएगी। उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
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डॉक्टर, संजय शर्मा, प्रभारी सीएमएस, जिला अस्पताल।
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