पिछले साल के विवाद को देखते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा कराने के फैसले पर काफी सतर्क दिखाई दे रहा है। सत्र 2017-18 के लिए ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा का फैसला पिछले साल ही ले लिया गया था, लेकिन इसे लागू करने से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से अनुमति लेने का निर्णय लिया है।
मंत्रालय के ही निर्देश पर पिछले साल विश्वविद्यालय में सभी पाठ्यक्रमों के सिर्फ ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया था, लेकिन छात्र-छात्राआें के विरोध के बाद स्नातक में ऑफलाइन का भी विकल्प दिया गया। बावजूद इसके छात्र नहीं माने और सभी पाठ्यक्रमों के लिए ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा का भी विकल्प देने की मांग को लेकर लंबा आंदोलन चला। सांसद समेत भाजपा के कई अन्य नेताओं ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया। इसके बाद यह मामला संसद में उठा और मानव संसाधन विकास मंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को पीछे हटते हुए ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा का विकल्प देना पड़ा।
इसकी वजह से पूरा प्रवेश कार्यक्रम दोबारा घोषित करना पड़ा। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन ने निदेशकों की नियुक्ति के साथ प्रवेश की प्रक्रिया तो शुरू कर दी है लेकिन ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा के फैसले पर अफसर अभी खुलकर बोलने से बच रहे हैं। प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी घोषित है। इसकी वजह से भी इसे लेकर सियासत गरमाने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन ने मंत्रालय की तरफ रुख किया है। रजिस्ट्रार प्रोफेसर एनके शुक्ला का कहना है कि मंत्रालय को पत्र लिखा जाएगा। वहां से जवाब आने के बाद निर्णय लिया जाएगा।