फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीतने को साल, नहीं बन सका महिला अस्पताल

Sun, 17 Dec 2017 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो - फोटो : pratapgarah
विज्ञापन
जिला महिला अस्पताल में प्रसव के लिए पहुंच रहीं महिलाओं को जलालत झेलनी पड़ रही है। इलाज की समुचित व्यवस्था न होने के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह हो जाती है कि अस्पताल में तैनात स्वास्थ्यकर्मी मजबूरी में एक बेड पर तीन-तीन प्रसूताओं को भर्ती कर इलाज कर रहे हैं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए जिला महिला के बगल में 100 बेड के नए महिला अस्पताल के निर्माण को मंजूरी मिली लेकिन बजट के अभाव में चार साल बाद भी काम पूरा नहीं हो सका है।
विज्ञापन

जिला महिला अस्पताल का निर्माण करीब सात दशक पहले हुआ था। तब जिले की आबादी बहुत कम थी और जरूरत के हिसाब से अस्पताल सही था लेकिन समय के साथ आबादी बढ़ती गई लेकिन महिला अस्पताल की सुविधाएं जस की तस रह गईं। अब प्रसूताओं के इलाज के लिए अस्पताल छोटा पड़ रहा है। पहले तो मरीज अधिक होने के कारण अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मी नए मरीजों को भर्ती नहीं करते। यदि दबाव में प्रसव पीड़िताओं को भर्ती भी कर लिया जाता है तो चिकित्सक उन्हें रैन बसेरा में जमीन पर ठहरने के लिए बोल देती हैं। एक-एक बेड पर तीन प्रसव पीड़िताओं और प्रसूताओं को भर्ती कर उपचार किया जाता है। करीब चार साले पहले प्रसूताओं की पीड़ा को दूर करने के लिए महिला अस्पताल के करीब ही 22 करोड़ 27 लाख की लागत से 100 बेड का महिला अस्पताल बनाने का फैसला किया गया। दिसंबर 2016 में ही अस्पताल भवन बनकर तैयार हो जाना था, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। अब तक बजट के अभाव में तीन मंजिला भवन ही बनकर तैयार हो सका। जिसके कारण अस्पताल भवन निर्माण कार्य ठप हो गया है। 2017 बीतने को है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के कान में जूं नहीं रेंग रही। भले ही स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि 2018 में अस्पताल शुरू हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं दिख रहा है। महिला मरीजों की समस्याओं के निदान के लिए जनप्रतिनिधि भी उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं जबकि लालगंज, पट्टी, रानीगंज से लेकर कुंडा तहसील से भी प्रसव पीड़िता उपचार कराने के लिए महिला अस्पताल आती हैं।
अधिक दबाव पड़ते ही रेफर की पर्ची
प्रसव पीड़िता को लेकर महिला अस्पताल भले ही एंबुलेंस लेकर आए लेकिन उनका उपचार स्वास्थ्यकर्मी से लेकर महिला डाक्टर तक अपनी मर्जी से करते हैं। यदि किसी मरीज के तीमारदार अधिक दबाव बनाने का प्रयास करता है तो तत्काल डाक्टर उसे इलाहाबाद के लिए रेफर वाली पर्ची थमा देती हैं। तमाम दिक्कतें मरीज के परिजनों को गिना दी जाती हैं। अस्पताल में सुविधाएं न होने के कारण स्वास्थ्यकर्मी भी एक बेड पर तीन प्रसूताओं का उपचार करने के लिए भागदौड़ करने से बचने का प्रयास करतीं हैं।
विज्ञापन

मरीजों का हो रहा शोषण
जिला महिला अस्पताल में उपचार कराने के लिए आने वाली प्रसव पीड़िताओं का शोषण भी हो रहा है। स्वास्थ्यकर्मियों के इंकार करने के बाद इलाहाबाद ले जाने में असमर्थ प्रसव पीड़िताओं को कथित आशाएं निजी अस्पताल ले जाती हैं। जहां मरीजों का जांच से लेकर प्रसव कराने तक शोषण होता है। इसके एवज में आशाओं को कमीशन मिलता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें