जिले के संडवा चंद्रिका विकास खंड में लॉकडाउन के दौरान मनरेगा में हुए घपले के जांच की फाइल नेताओं की घुड़की मिलते ही अफसरों ने बंद कर दी है। जांच टीम के समक्ष पांच ग्राम पंचायतों के सचिवों ने फाइल देने से इंकार कर दिया था। मगर जब अफसरों का दबाव बढ़ा तो नेताओं नेे दखल देना शुरू कर दिया।
मनरेगा में भ्रष्टाचार रोकने की अफसर की मुहिम धीमी पड़ गई है। इसकी वजह नेताओं का हस्तक्षेप बढ़ना बताया जा रहा है।
लॉकडाउन के दौरान संडवा चंद्रिका विकास खंड की 14 ग्राम पंचायतों में अंधाधुंध भुगतान होने पर सीडीओ ने डीडीओ की अध्यक्षता में पीडी और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को नामित करते हुए पूरे मामले की जांच करने को कहा था। लगभग पंद्रह दिन पूर्व जांच टीम के तीनों अफसरों ने ब्लाक मुख्यालय पहुंचकर सचिवों का बयान लेने के साथ ही अभिलेख भी अपने कब्जे में लिया था। दांदूपुर, जलालपुर, पूरेपांडेय कमोरा, अंतू देहात और कमालुद्दीन ग्राम पंचायतों के सचिवों ने जांच अफसरों को फाइल देने से साफ मनाकर दिया था। जांच टीम के सदस्यों ने सचिवों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था। मगर जब अफसरों ने कर्मचारियों पर दबाव बनाया तो नेताजी ने हस्तक्षेप करते हुए फाइल बंद करने को कहा। बेचारे अफसरों ने अपने को अलग करते हुए जांच की फाइल बंद कर दी है। जांच टीम के अध्यक्ष और डीडीओ सुदामा प्रसाद ने बताया कि जब फाइल ही नहीं मिली, तो जांच क्या करें। फिलहाल जांच की फाइल बंद कर दी गई है।