यात्रियों की सहूलियत के लिए रोडवेज डिपो को मॉडल बस अड्डा बनाने की कवायद मूृर्त रूप लेती नजर नहीं आ रही है। तीन साल से इसका निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन अभी तक आधा भी काम नहीं हो सका है। बजट के अभाव में जब-तब काम ठप हो जाता है। 2.36 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मॉडल बस अड्डे की न तो फर्श बनी है और न ही यहां दरवाजा और खिड़की लगी है। आलम यह है कि निर्माणाधीन भवन में ही कर्मचारी बैठकर काम कर रहे हैं। निर्माण कार्य जिस हिसाब से हो रहा है, उसे देखकर कहीं से नहीं लगता है कि वर्ष 2018 में भी यह बन पाएगा।
शहर के रोडवेज बस अड्डे को मॉडल बस अड्डे के रूप में विकसित करने के लिए 2.36 करोड़ शासन ने जारी किए हैं। कार्यदायी संस्था मुकेश कारपोरेशन लखनऊ को मॉडल बस अड्डे को बनाने की जिम्मेदारी मिली थी। तीन वर्ष से निर्माणाधीन भवन में अभी तक दो तिहाई धनराशि खर्च हो चुकी है, मगर न तो फर्श बनी है, न ही दरवाजा और न ही खिड़की लगी है। आधा-अधूरा भवन है। आधा से अधिक काम बाकी है। बिल्डिंग का प्लास्टर तो हो गया, मगर अभी फर्श का प्लास्टर होना बाकी है। कार्यदायी संस्था को अक्तूबर 2017 तक मॉडल बस अड्डा तैयार करके हैंडओवर करना था। मगर निर्माण कार्य बंद होने से इसके अस्तित्व को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। 2018 में भी इसका बन पाना मुश्किल है। बस अड्डे के निर्माणाधीन होने के कारण सबसे ज्यादा फजीहत यात्रियों की हो रही है। उन्हें बंदर बैठने के लिए जगह तक नहीं है। लोग मजबूरी में बाहर आसपास की दुकानों पर बसों के इंतजार में बैठे रहते हैं। बसें भी बाहर ही खड़ी होती हैं। इससे जब-तब भीषण जाम लग जाता है। फिलहाल निर्माण कार्य में लगे मजदूर और कर्मचारी इस समय नदारद हैं। सिर्फ चौकीदार रखवाली कर रहे हैं।
मंत्री के आश्वासन के बाद भी नहीं चली वॉल्वो ःयोगी सरकार के परिवहन राज्य मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बस अड्डे का निरीक्षण करके बेल्हा के लोगों को तोहफा देने के लिए बेल्हा से दिल्ली, कानपुर और लखनऊ के लिए वॉल्बो बस चलाने का आश्वासन दिया था। मगर अभी तक जिले से एक भी वॉल्बो बस नहीं चली है।