बाघराय से पकड़े गए तेंदुए की सेहत में सुधार नहीं हो पा रहा है। वह लगातार दहाडने के साथ पिंजरे से टकरा रहा है। जिससे उसके घाव नहीं सूख पा रहे हैं। उसकी हालत को देखते हुए वन विभाग की टीम ने उसे कानपुर चिडिय़ाघर ले जाने की तैयारी स्थगित कर दी है। चिकित्सकों द्वारा घायल तेंदुए का उपचार जारी है। हालांकि 48 घंटे तक भूखे-प्यासे रहने के बाद रविवार देरशाम उसने मुर्गे के मांस खाने के साथ पानी भी पीया।
बाघराय बाजार से दबोचकर तेंदुए को चिलबिला लाए तीन दिन हो गए हैं। शुक्रवार की रात उसे पिजेड़े में कैद कर वन विभाग की टीम यहां ले आई थी। शनिवार को सुबह उसके उपचार में कानपुर की टीम के साथ ही जिले के चिकित्सक भी लगे। फौव्वारा विधि से दवाइयों का प्रयोग कर उपचार शुरू किया गया। खाने में उसे बकरे का मांस दिया गया, मगर दर्द अधिक होने के चलते उसने उसे मुंह तक नहीं लगाया। क्रोध में आकर बार-बार वह पिजड़े से टकरा रहा था। जिससे मुंह के घाव की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका। रविवार को देरशाम तेंदुए के लिए मुर्गे का मांस मंगवाया गया। चिकित्सकों ने उपचार कर उसे मुर्गे का मांस दिया। वन दरोगा श्रीराम ने बताया कि रात में तेंदुए ने मुर्गे का मांस खाने के साथ पानी भी पीया। माना जा रहा था कि सोमवार को उसकी सेहत में काफी सुधार होगा। तैयारी थी उसे कानपुर चिडिय़ाघर ले जाने की, मगर सुबह तेंदुए की सेहत में अपेक्षा के अनुरूप सुधार न होने से यह योजना स्थगित कर दी गई। विभागीय कर्मचारियों की मानें तो बार-बार पिजड़े में टकराने की वजह से दवाइयों का असर प्रभावी रूप से नहीं हेा पा रहा है। पिजड़े से टकराने की वहज से घाव में बहुत सुधार नहीं हो पा रहा है। सोमवार को पूरे दिन तेंदुए का उपचार किया गया।
न ले जा पाने की यह भी रही वजह
डीएफओ वाईपी शुक्ल ने बताया कि कानपुर जू में पकड़े कर लाए गए दो तेंदुओं की चेकिंग रिपेार्ट तैयार की जा रही है। माना जा रहा है कल उनकी चेकिंग रिपोर्ट आ जाएगी और उन्हें वाइल्ड रिलीज कर दिया जाएगा। कानपुर न ले जाने की यह भी मुख्य वजह रही। मंगलवार को उन्हें वाइल्ड रिलीज किया जाएगा। ऐेसे में मंगलवार को तेंदुए को कानपुर जू भेजा जा सकता है।
मांस में दी जा रहीं हाई एंटीबाॅयोटिक व मल्टी विटामिन दवाएं
बकरे के मांस से मुंह फेर चुके तेंदुए को मुर्गे का मंास रास आ रहा है। ऐसे में चिकित्सक अब मुर्गे के मांस में हाई एंटीबायटिक एवं मल्टी विटामिन मिलाकर तेंदुए को दे रहे हैं। डाक्टरों का कहना है कि मांस के सहारे तेंदुए को निर्धारित दवाइयों की खुराक दी जा रही है। पहले से काफी असर है।
घायल तेंदुए के उपचार के लिए कानपुर के विशेषज्ञों की कांफ्रेंसिंग के जरिए सलाह ली जा रही है। डा. आरके सिंह व डा. नासिर के निर्देशानुसार यहां के डाक्टर उपचार कर रहे हैं।