स्वास्थ्य मंत्री शिवाकांत ओझा के गृह जनपद में शुक्रवार को चिकित्सा व्यवस्था की पोल खुल गई। पिता की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए बेटा एंबुलेंस मांगता रहा, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। हालत बिगड़ते देख वह किसी तरह साइकिल पर ही पिता को लादकर सीएचसी बेलखरनाथ पहुंचा। यहां काफी देर तक वह डाक्टरों की तलाश में भटकता रहा। काफी देर बाद पहुंचे वार्ड ब्वाय के इंजेक्शन लगाते ही अधेड़ की मौत हो गई। इससे गुस्साए लोगों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। उनका कहना था कि समय रहते इलाज शुरू हो जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
आसलपुर कंधई निवासी अफजल (55) की तबीयत शुक्रवार दोपहर अचानक बिगड़ गई। वह बोल नहीं पा रहा था। हालत गंभीर देख बेटे बबलू ने एंबुलेंस सेवा के लिए कई बार फोन लगाया, लेकिन सहायता नहीं मिली। इस पर वह किसी तरह साइकिल पर ही पिता को लादकर बेलखरनाथ सीएचसी पहुंचा।
अस्पताल में काफी देर भटकने के बाद उसे डॉक्टर मिले। डॉक्टर के कहने पर वार्ड ब्वाय ने अफजल को इंजेक्शन लगाया। कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई। इससे गुस्साए परिवार वालों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। आरोप लगाया कि इलाज में लापरवाही के साथ ही देरी बरती गई। अगर समय से इलाज शुरू हो जाता तो जान बचाई जा सकती थी।
मरीज साढ़े ग्यारह बजे से बारह बजे के बीच आया था। उसकी हालत नाजुक थी। उसे ऑक्सीजन की जरूरत थी इसलिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। इंजेक्शन वार्डब्वॉय ने नहीं डा. नीरज ने लगाया था। एंबुलेंस समय पर नहीं मिली। अस्पताल से बाहर निकलते ही उसकी मौत हो गई। -सुनील यादव, अधीक्षक, सीएचसी, बेलखरनाथ।