मुख्यालय से मात्र 14 किमी दूर स्थित कोहंड़ौर सीएचसी में एक तरफ जहां स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा है, वहीं दूसरी तरफ अधीक्षक से लेकर डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी मनमानी पर उतारू हैं। ओपीडी से लेकर वार्ड तक मरीज तड़प रहे हैं, लेकिन किसी को उनकी फिक्र नहीं। शासन ने मरीजों की सुविधा के लिए भर्ती से लेकर सभी जांच भले ही नि:शुल्क कर दिया हो, मगर स्वास्थ्य कर्मचारी ब्लड जांच के लिए भी 50-50 रुपये वसूल रहे हैं। सीएचसी अधीक्षक से भी मरीजों की मुसीबतों से कोई लेना-देना नहीं है।
वह अपने कक्ष मैं बैठकर अन्य चिकित्सकों को बुलाकर केवल गप्पा लड़ाते रहते हैं। सीएचसी का पोर्टिकों वाहन स्टैंड बन गया है। इमरजेंसी में आने वाली प्रसव पीड़िताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इससे परेशान मरीजों को मुख्यालय भागना पड़ता है।
जिले की अमेठी, सुल्तानपुर सीमा पर स्थित सीएचसी कोहंडौर में अव्यवस्था का बोलबाला है। सरकारी दवाएं अस्पताल में डंप है, मगर मरीजों को वितरित नहीं की जा रही है। ब्लड जांच के लिए मरीजों से पचास-पचास रुपये वसूले जाते हैं। उसका गांव निवासी लालता प्रसाद ने बताया कि ब्लड जांच के लिए उनसे पचास रुपये लिए गए।
यह सिर्फ एक व्यक्ति की बात नहीं है, बल्कि यह नाम उदाहरण के तौर पर दिया जा रहा है। वैसे तो अस्पताल में डॉ. भरत पाठक, डॉ. जीतेंद्र प्रसाद और डॉ. विनीता सिंहा की तैनाती है। मगर ये लोग अधीक्षक के चेंबर में बैठककर सिर्फ गप्पे लड़ाते रहते हैं, मरीज देखने का कार्य आयुष चिकित्सक डॉ. आलोक पांडेय और डॉ. घनश्याम तिवारी करते हैं।