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करोड़ों रुपये खर्च किए, कहां- इसका पता नहीं

Tue, 13 Sep 2016 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
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सूखे का फायदा किसानों को कम औरों को ज्यादा - फोटो : BBC
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जिले में ऊसर सुधार के नाम पर लंबा गोलमाल किया गया है। ऊसर सुधार के लिए मिले लाखों रुपये की बंदरबाट के बाद अफसरों ने शासन को गलत रिपोर्ट भी भेज दी। ऊसर सुधार निगम के अफसरों ने शासन के पास जो रिपोर्ट भेजी है उसके मुताबिक जिले में अब ऊसर जमीन नहीं है। अब यहां बीहड़ और बंजर भूमि का सुधार किया जाएगा। इसके उलट कृषि विभाग का दावा है कि जिले में अभी भी 9,014 हेक्टेअर जमीन ऊसर पड़ी है। ऐसे में ऊसर निगम के अफसरों के दावे पर सवाल खड़ा हो गया है। जिले में कहां और कितनी ऊसर जमीन सुधारी गई, निगम के अफसरों के पास इसका रिकार्ड भी नहीं है। ऐसे में साफ है कि ऊसर सुधार के नाम पर जिले में लंबा खेल किया गया है।

जिले की ऊसर जमीन को सुधारने के लिए विश्वबैंक की सहायता से ऊसर सुधार निगम की स्थापना की गई है। लाखों रुपये का निजी भवन और तीन दर्जन से अधिक कर्मचारियों की तैनाती कर जिले की ऊसर जमीन को सुधारने के लिए वर्ष 1995 में योजना का क्रियान्वयन शुरू हुआ। ऊसर सुधार निगम को करोड़ों रुपये का बजट देने वाले विश्वबैंक ने 31 अक्तूबर 2007 को बजट देने से हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद चार वर्ष योजना पूरी तरह बंद रही। वर्ष 2010-11 में विश्वबैंक ने तीसरा चरण प्रारंभ करने के लिए भारी भरकम बजट दिया। पांच वर्ष के अभियान में करोड़ों रुपये ऊसर सुधारने में पानी की तरह बहाए गए, लेकिन विभाग के पास कोई ऐेसा आंकड़ा नहीं है जिससे पता चले कि इन पांच वर्षों में कितनी ऊसर भूमि सुधारी गई।
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विभागीय अधिकारी दावा कर रहे हैं कि जिस गांव में 28 हेक्टेअर या इससे अधिक ऊसर जमीन होती है, उसी गांव में प्रोजेक्ट प्रारंभ होता है। इससे कम जमीन होने पर ऊसर सुधार का कार्यक्रम नहीं चलता है। वहीं कृषि विभाग 9014 हेक्टेअर जमीन ऊसर होने की बात कह रहा है। हालांकि ऊसर सुधार निगम के आंकड़ों पर शासन ने विश्वास करते हुए अब जिले में ऊसर भूमि सुधारने के बजाय बीहड़ और बंजर भूमि सुधारने का फैसला किया है। पहले चरण में चार सौ हेक्टेअर जमीन चिह्नित की गई है।

ऊसर और बंजर-बीहड़ में क्या है अंतर
ऊसर भूमि वह होती है जिसमें साल्ट (सफेद परत) जमीन की ऊपरी सतह पर जमी होती है। इस जमीन को उपजाऊ बनाने में कम से कम तीन साल लग जाते हैं। बीहड़ और बंजर जमीन वह है जो नदी और नालों के किनारे मिट्टी के कटाव के चलते ऊबड़-खाबड़ हो जाती है। मिट्टी को समतल करके खेती योग्य बनाया जाता है।

'कौन कहता है कि जिले में ऊसर जमीन नहीं'
जिला कृषि अधिकारी डीपी सिंह कहते हैं कि कौन कहता है कि जिले में ऊसर भूमि नहीं है। बीते वर्ष हुए सर्वे में 9,014 हेक्टेअर जमीन ऊसर मिली थी। यह अलग बात है कि ऊसर सुधार निगम के कुछ कुछ और मानक हों।
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ऊसर सुधार निगम ने अभी तक कितनी जमीन सुधारी है, इसका कोई रिकार्ड नहीं है। ऊसर सुधारने के लिए जो भी बजट मिला था, उसे किसानों में खर्च कर दिया गया है। अब जिले में ऊसर जमीन नहीं है। इसलिए बीहड़ और बंजर भूमि सुधारने के लिए 400 हेक्टेअर भूमि चिह्निनत की गई है।
एसके सिंह, परियोजना प्रबंधक ऊसर भूमि सुधार निगम।
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