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कोरोना वायरस के खिलाफ पर्याप्त इंतजाम नहीं

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जिला अस्पताल में बना आइशोलेसन वार्ड। - फोटो : PRATAPGARH
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पूरी दुनिया के लिए महामारी बन गए कोरोना वायरस से बचाव के लिए केंद्र और राज्य सरकार भले ही तमाम जतन कर रही हों, लेकिन स्वास्थ्य महकमा इसे लेकर पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। शासन की सख्ती के बाद खानापूर्ति के लिए जिला अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है, लेकिन इसमें न डाक्टर हैं न एक भी कर्मचारी। हैरान करने वाली बात यह है कि आई वार्ड में आइसोलेशन वार्ड बना दिया गया है, जहां दिनभर में सैकड़ों लोग आते जाते हैं। ऐसे में अगर किसी संक्रमित को वार्ड में रखा गया तो संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ जाएगा। इस वार्ड में दस बेड रखे गए हैं। शनिवार को बेडों पर गंदे चादर बिछाए गए थे। उन पर धूल और मिट्टी पड़ी थी।
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जिला अस्पताल में कोरोना की जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। डाक्टरों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के अंदर जांच के लक्षण मिलते हैं तो उसके ब्लड का सैंपल लेकर जांच के लिए लखनऊ या वाराणसी भेजना होगा। उसके बाद यदि पुष्टि होती है तो मरीज को वेंटीलेटर के लिए प्रयागराज या फिर लखनऊ रेफर करना होगा। हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग दावे तो कर रहा है, लेकिन कोरोना को लेकर जरा भी सावधानी नहीं बरती जा रही है। दरअसल, विभाग खुद मरीजों की जांच करने को लेकर संजीदा नहीं है। खानापूर्ति के लिए कंट्रोलरूम खोलकर मरीज के आने का इंतजार किया जा रहा है। अस्पताल में इन दिनों सर्दी-जुकाम, बुखार, जकड़न और सांस फूलने जैसी समस्या से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है। करीब-करीब यही लक्षण कोरोना के भी हैं। डाक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं, लेकिन किसी से उनकी हिस्ट्री नहीं पूछी जा रही है। हालांकि जिले के लोगों के लिए राहत भरी खबर यह है कि यहां अभी तक कोरोना के एक भी संदिग्ध नहीं मिले हैं।
कोरोना के संदिग्ध मरीजों को रखने के लिए जिला अस्पताल में जहां आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है, उसके ठीक पीछे भीषण गंदगी है। देखने के बाद लगता है जैसे वर्षों से वहां सफाई नहीं हुई है। आई वार्ड के ठीक पीछे कर्मचारियों के आवास के बगल खाली पड़ी जगह में भारी कूड़ा-कचरा के साथ गंदे कपड़े फेंके हुए हैं। इसी के ठीक सामने आइसोलेशन वार्ड है।
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बीते तीन-चार दिनों से मौसम में जारी उठापटक के चलते इस समय सर्दी-जुकाम, बुखार और वायरल के मरीज तेजी से पड़े हैं। दिन-रात के तापमान में अंतर और सर्दी-गर्मी के बीच लोग तेजी से वायरल और सर्दी-जुकाम की चपेट में आ रहे हैं। सिरदर्द के साथ ही बच्चों और बुजुर्गों में निमोनिया की भी शिकायतें लगातार मिल रही हैं। टीवी के साथ ही अखबारों में कोरोना के भी यही लक्षण पढ़कर लोग दहशत में आ जा रहे हैं। खांसी आने पर भी लोग तुरंत अस्पताल भाग रहे हैं। जिला अस्पताल के फिजिशियन डा. मनोज खत्री ने बताया कि इन दिनों वायरल और जुकाम के मरीज बढ़े हैं, लेकिन घबराने की बात नहीं है। मौसम के चलते लोगों में ऐसे लक्षण मिल रहे हैं। सात दिन के भीतर अपने आप यह समस्या दूर हो जाती है। बालरोग विशेषज्ञ डा. अनिल गुप्ता ने बताया बच्चों को निमोनिया की शिकायत है। मौसम में उतार-चढ़ाव के चलते उन्हें जकड़न हो रही है और सांस लेने में दिक्क्त हो रही है। कोरोना की दहशत का असर है कि लोग तुरंत बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिससे बच्चों का समय पर इलाज हो जा रहा है। हालांकि इसका कोरोना वायरस से कोई संबंध नहीं है। बच्चों को निमोनिया की शिकायत है।
शनिवार को जिला अस्पताल में भी डाक्टरों और कर्मचारियों में कोरोना का खौफ दिखा। जिला अस्पताल की ओपीडी में सभी डाक्टर मास्क पहनकर मरीजों का इलाज कर रहे थे। जिला अस्ताल के सर्जन कक्ष में शनिवार को चार-पांच डाक्टर बैठे थे। कोरोना वायरस को लेकर ही चर्चा छिड़ी थी। डाक्टर खुद एक-दूसरे को सलाह दे रहे थे कि कोराना वायरस से बचाव के लिए खुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ानी होगी। मौसम के बदलाव से खुद को प्रभावित होने से बचाना होगा। जिला अस्पताल के तकरीबन सभी कर्मचारी भी शनिवार को मास्क पहनकर घूमते नजर आए।
जिस कोरोना वायरस को लेकर दुनियाभर में डर का माहौल है दरअसल वह कोविड-19 नाम का नया वायरस है। इसका कोई इलाज या टीका अभी तक विकसित नहीं किया जा सका है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. मनोज खत्री ने बताया कि कोरोना पहले से लोगों को होता रहा है। यह एक तरह का फ्लू है।
यह वायरल फीवर में भी होता था। अभी दुनियाभर में जो फैल रहा है वह नोबेल कोरोना यानि कोविड-19 वायरस है। यह सामान्य कोरोना वायरस से दस गुना ज्यादा ताकतवर है। शरीर में एंटीबाडीज बनाने का मौका ही नहीं देता है।
नोबेल कोरोना वायरस उन लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक है जो पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे हैं। यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर यह वायरस ज्यादा हमलावर होता है। जिला अस्पताल के फिजिशिन डा. मनोज खत्री ने बताया कि अगर किसी में नोबेल कोरोना वायरस के लक्षण हैं और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ठीक है तो उसकी मरने की आशंका न के बराबर है। यह वायरस बुजुर्गों, डायबिटीज, हर्ट के मरीज, दमा, ब्लड प्रेशर, किडनी के मरीज, एचआईवी पीड़ित, खून की कमी से जूझ रहे लोग और कैंसर के मरीजों के लिए अधिक घातक है। नोबेल कोरोना वायरस से पीड़ित होने के बाद व्यक्त का फेफड़ा जकड़ जाता है। जिससे उसमें आक्सीजन नहीं पहुंचती और दम घुटने से मौत हो जाती है।
डाक्टर मनोज खत्री ने बताया कि जिला अस्पताल में इसकी जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। सीने में भारीपन, जकड़न, सांस लेने में दिक्कत, खांसी, जरा सा चलने में सांस फूल जाना नोेबेल कोरोना वायरस के लक्षण हैं, लेकिन किसी पीड़ित व्यक्ति के कहीं संपर्क में आने के बाद ही किसी को संदिग्ध माना जाएगा। जब तक कान्टैक्ट हिस्ट्री नहीं रहेगा तब तक किसी को संदिग्ध नहीं माना जा सकता है। अगर कोई विदेश से आया है, या फिर विदेशों से आने वाले के कहीं से संपर्क में आया है और ये सारे लक्षण उसमें हैं तभी उसे संदिग्ध माना जाएगा। यहां कोई सुविधा नहीं है। संदिग्ध का ब्लड सैंपल लेकर जांच के लिए लखऊ या वाराणसी भेजा जाएगा।

जिला अस्पताल में बने आइशोलेसन वार्ड के पीछे फैली गंदगी।- फोटो : PRATAPGARH

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