सरकार ने नयनादेवी में पांच मेगावाट का सौर ऊर्जा पार्क बनाने की घोषणा की थी।
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अब जिले के होनहारों को बिजली गुल होने पर लालटेन व ढिबरी का सहारा नहीं लेना होगा। वह सोलर लैंप की रोशनी में पढ़ाई करेंगे। ऊर्जा मंत्रालय के प्रयास से बाएफ ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी गई। पहले चरण में बिहार ब्लाक के 37 हजार बच्चों को सोलर लैंप वितरण का क्रम शुरू हो गया है। जबकि दूसरे चरण में गौरा ब्लाक में 67 हजार बच्चों के लिए सोलर लैंप बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। दोनों ब्लाकों में परिषदीय विद्यालयों के साथ ही जीआईसी व स्ववित्तपोषित कालेजों में पढने वाले बच्चों को यह लैंप वितरित किए जाएंगे।
जिले में बिजली अव्यवस्था किसी छुपी नहीं है। शहर और गांव में भले ही 24 और 18 घंटे विद्युत आपूर्ति के दावे किये जा रहे हो मगर हकीकत इससे इतर है। शहर में 7 से 8 घंटे की कटौती की जा रही है जबकि गांवों में अव्यवस्था का ऐसा आलम है कि लोगों को विद्युत खराबी के चलते हप्तेभर भर रोशनी से नहरूम रहना पड़ता है। यह अव्यवस्था परीक्षा के दौरान खूब अखरती है और बच्चों की पढ़ाई खूब प्रभावित होती है, मजबूर होकर छात्र- छात्राओं को ढिबरी व लालटेन का सहारा लेना पड़ता है। मगर अब बिजली गुल होने के बाद बच्चों को इस अव्यवस्था से दो चार नहीं होना पडेगा। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय एमएनआरई द्वारा कक्षा 1 से लेकर 12 तक बच्चों को सूर्यप्रकाश से संचालित होने वाले सोलर लैंप मुहैया कराने की पहल शुरू की है। इसकी जिम्मेदारी भारतीय एग्रो इंडस्ट्रीज फाउंडेशन बाएफ को साैंपी गई है। सोलर लाइट को बनाने के लिए बाएफ केन्द्रों पर बकायदा महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रोजेक्ट मैनेजर शांति मिश्रा बताती हैं कि प्रथम चरण में बिहार ब्लाक को चुना गया है जहां वितरण का क्रम जारी है। कक्षा 1 से 12 तक करीब 37 हजार बच्चों को सोलर लैंप वितरण करने की योजना है। जबकि दूसरे चरण में गौरा ब्लाक को चुना गया है। यहां करीब 67 हजार बच्चों को लैंप वितरण करने की योजना है। इसके लिए बाएफ केन्द्र पर सोलर लैंप बनाए जा रहे है। उन्होंने बताया कि वैसे तो सोलर लैंप की कुल कीमत 700रूपए है, जबकि सहूलियत के तौर पर छात्रों को महज 100 रूपए में दिए जाएगे। सालभर किसी तरह की दिक्कत आने पर मुफ्त में इसकी रिपेरिंग भी की जाएगी। इसके केन्द्र बनाए का भी निर्धारण किया जाएगा।