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निखरने से पहले ही दम तोड़ रहीं फुटबाल प्रतिभाएं

Sat, 21 Oct 2017 10:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ - फोटो : pratapgarah
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पूरे देश पर इन दिनों फुटबाल अंडर 17 वर्ल्ड कप का खुमार छाया हुआ है। भारतीय टीम भले ही प्रतियोगिता में बहुत अच्छा प्रदर्शन न कर पाई हो लेकिन खिलाड़ियों और प्रशंसकों का रोमांच कम नहीं हुआ है। जिले में भी तमाम प्रतिभावान फुटबाल खिलाड़ी हैं लेकिन संसाधनों का अभाव उनकी राह में रोड़ा बन रहा है। इन्हें तराशने के लिए न तो यहां ढंग के मैदान हैं और न ही कोच। ऐसे में खिलाड़ियों को निराश होना पड़ रहा है।
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जिले में रहने वाले उदीयमान फुटबाल खिलाड़ियों की नजर भी फीफा अंडर 17 विश्वकप पर गड़ी हुई है। दरअसल उनके मन में भी सुनील छेत्री, बाईचुंग भूटिया, धीरज सिंह जैसे भारत के स्टार फुटबालरों की तरह कुछ कर गुजरने का जुनून है। हर रोज दोपहर तीन बजे दर्जनों फुटबाल खिलाड़ी स्टेडियम में अभ्यास भी करते है। हालांकि इनके हुनर को तराशने के लिए माकूल इंतजाम नहीं हैं। आलम यह है कि स्टेडियम में एक स्थायी कोच नहीं है। खिलड़ियों का कहना है कि उन्हें नियमित रूप से प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता है। जिस मैदान पर वह अभ्यास करते हैं, फुटबाल के खेल के लिए वह उपयुक्त नहीं है। स्टेडियम के क्रिकेट मैदान में ही उन्हें फुटबाल का प्रशिक्षण प्राप्त होता है। यह हाल तब है कि जब जिले से ही निकले कालिया ने राष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में पहचान बनाई थी।

घटकर 25 से 30 तक पहुंच गई खिलाडिय़ों की संख्या  
स्टेडियम में फुटबाल खिलाडिय़ों के रजिस्ट्रेशन की संख्या कम नहीं रहती है। खेल को लेकर बच्चों की संख्या शुरू में तेजी से बढ़ती है। मगर नियमित अभ्यास करने के लिए स्टेडियम आने वाले खिलाडिय़ों के हौसले यहां की अनदेखी और अव्यवस्था के चलते टूट कर बिखर जाते है। यही कारण है कि कभी सौ के पार रहने वाली खिलाड़ियों की संख्या इन दिनों 30 पर पहुंच गई है।
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