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628 अवैध विद्यालय, कार्रवाई एक पर नहीं

Mon, 30 Oct 2017 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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बेसिक शिक्षा विभाग के कारनामे भी बड़े अजीब हैं। जिले में बिना मान्यता और मानक के संचालित होने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर नौटंकी की जा रही है। पिछले पांच वर्षों में विभाग के अफसरों ने 628 अमान्य स्कूलों को चिह्नित किया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस थमाया गया। एक भी स्कूल विभाग बंद नहीं करा सका और न ही किसी के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया गया। हालांकि इनमें से कई विद्यालयों ने बाद में मान्यता हासिल कर ली।
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खुद विभाग के ही आंकड़ों पर गौर किया जाए तो वर्तमान में जिले में कक्षा एक से आठ तक के 628 अवैध स्कूल चल रहे हैं। इनमें से 332 स्कूल ऐसे हैं, जिन्हें विभाग ने अभी तक नोटिस दिया है। 296 स्कूल ऐेसे हैं, जिनकी तरफ अफसरों ने देखना भी मुनासिब नहीं समझा। जिन स्कूलों को नोटिस मिला है उनमें अधिकांश ऐसे विद्यालय हैं, जिनकी शिकायत स्थानीय लोगों ने की है या मान्यता पाने वाले कान्वेंट स्कूलों ने। विभाग ने स्वत: संज्ञान लेकर किसी स्कूल के खिलाफ अभी तक कार्रवाई नहीं की है। ग्रामीण इलाकों में स्थित अधिकांश स्कूलों को अवैध से वैध का प्रमाणपत्र दिलाने का ठेका खंड शिक्षा अधिकारियों ने ले रखा है। यही वजह है कि छह माह बाद भी अभी तक न तो किसी अवैध स्कूल के खिलाफ मुकदमा हुआ है, और न ही किसी स्कूल को बंद कराया गया है। जब कभी कोई व्यक्ति अवैध स्कूलों के खिलाफ शिकायत करता है, तो विभाग भी नोटिस जारी करके कागजी कोरम पूरा कर लेता है। दरअसल नोटिस देने के बाद अफसर और शिक्षा विभाग के कर्मचारी सेटिंग में जुट जाते हैं। फिर स्कूल संचालक को या तो मान्यता दिलाई जाती है या फिर लेनदेन कर मामला दबा दिया जाता है।

सेटिंग पर चल रहा है सब खेल
अवैध स्कूल बंद न होने का प्रमुख कारण सेटिंग है। खंड शिक्षा अधिकारी का स्कूलों से सीधा संपर्क होता है। वह कागजी कोरम पूरा करने तक ही सीमित रहते हैं। अधिकारी अगर स्कूल बंद कराने की पहल भी करते हैं तो वह अंदर ही अंदर डरा धमकाकर चलते रहने देने की सलाह देते हैं। अवैध स्कूलों पर कार्रवाई करने के लिए जिला प्रशासन ने बीएसए, डीआईओएस, एसडीएम और सीओ सिटी के निर्देशन में टीम का गठन किया था। बीते सत्र में इस टीम ने पांच स्कूलों का निरीक्षण भी किया। मगर उसके बाद से अभियान बंद हो गया।
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