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पानी की धार बंद फटी धरती का निशां तक गायब!

Fri, 01 May 2015 02:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
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आसपुर देवसरा। क्षेत्र के सैफाबाद बाजार स्थित कालूराम इंटर कॉलेज के बगल हज़रत जाफ़र शहीद बाबा रहमत उल्ला की मजार के पास बुधवार रात धरती फटने से निकल रही पानी की धार सुन भोर से ही वहां तमाम लोग पहुंच गए। देखा गया कि पानी की धार बंद है। गुरुवार को मजार के सामने स्थित चिलबिल के पेड़ से पानी की फुहार पड़ने की बात प्रचारित की गई। यह सुन दोपहर तक वहां लोगों का मजमा लग गया। हालांकि इस मामले को तमाम लोग अंधविश्वास तो कुछ अल्लाह का करम और ईश्वर की दुआ मान रहे हैं। बहरहाल चमत्कार मानते हुए वहां लोगों का आवागमन शाम तक जारी रहा।
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बुधवार की रात क्षेत्र के कुछ लोगों को पता चला कि मजार के पास धरती फट गई है। जिससे पानी की धार निकल रही है। रात होने के नाते मौके पर जाना लोग मुनासिब नहीं समझे। भोर होते ही इलाकाई लोग वहां पहुंचने लगे। देखा गया कि जिस जगह धरती फटने की बात की गई थी उस स्थान पर पूरी तरह समतल हो गया है और पानी की धार भी बंद है। इस बात को वहां पहुंचे तमाम लोग चमत्कार बताते रहे। गुरुवार को प्रचारित किया गया कि मजार के सामने स्थित चिलबिल के पेड़ से पानी की फहार पड़ रही है।

खबर जंगल में आग की तरह फैली तो दोपहर तक लोगों का मजमा लग गया। मौके पर मौजूद निशार अहमद, पप्पू मौर्या, अकरम, शाहिम, रमाशंकर विश्वकर्मा, मो. रईश, हादिस सेठ, असगर अली, मो. अब्बास, फारुक शाह, जितेन्द्र, संदीप पांडेय, रमाशंकर शुक्ला, लबली मिश्र आदि इसे चमत्कार मान रहे हैं। एक वर्ग अल्लाह का करम तो दूसरा इसे मजार के पास स्थित पहलवान बीर बाबा की कृपा मान रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मौके पर खड़े कुछ लोग सारी बात को अंधविश्वास कह रहे हैं। जितने लोग उतनी तरह की बातें सुनने को मिल रही हैं। हालांकि दैवीय चमत्कार मानने वालों का वहां तांता लगा हुआ है। शाम करीब सात बजे क्षेत्र के पीलीपुर के पास स्थित लसोढ़ा के पेड़ से पानी की बूंदें गिरने की चर्चा आम हुई। क्षेत्र के अनिल, संदीप पांडेय, प्रताप वर्मा आदि ने कहा कि ऐसी खबर सुनने को मिली है। पता चला है कि वहां पर लोग पूजा पाठ शुरू कर दिए हैं।
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हज़रत जाफ़र शहीद बाबा रहमत उल्ला की मजार व बगल स्थित पहलवान बीर बाबा का स्थान हिन्दू-मुस्लिम एकता का इस दौर में अनोखा मिशाल है। वहां मौजूद रमाशंकर शुक्ल, सुरेश मिश्र, जितेन्द्र पांडेय व असगर अली, मो. अब्बास आदि कहते हैं कि एक बाद दुआ और पूजा पाठ को लेकर दो वर्गों में संघर्ष हो गया था। उस वक्त यह क्षेत्र मछली शहर लोकसभा इलाके में आता था। विवाद के दौरन पहुंचे अधिकारियों व तत्कालीन सांसद शिवशरन वर्मा की मौजूदगी में ऐतिहासिक फैसला हुआ। सहमति बनी की मंगलवार को हिन्दू और गुरुवार को मुस्लिम भाई यहां दुआ करेंगे। तभी से यहां दोनों वर्ग आपस में एकता का मिशाल कायम करते हुए अपनी-अपनी मान्यता के मुताबिक दुआ और पूजा पाठ करते आ रहे हैं। मजार के संरक्षक हामद सुलेमान खादिम कहते हैं कि वह करीब तीस साल से वहां रहते हैं। कहना है कि दोनों वर्ग के लोग यहां बड़ी आस्था और सामंजस्य के साथ मनौती मानने के लिए आते जाते रहते हैं।
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