वित्तीय सत्र समाप्त होने वाला है और विकास से जुड़े कई विभागों के काम अधूरे हैं। तमाम योजनाओं का बजट अब तक खर्च नहीं हो सका है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद अफसरों को पैसा वापस करना पड़ेगा। ऐसे में अधिकारी अब कागज में ही सारा काम दुरुस्त दिखाने को लेकर दिमाग खपा रहे हैं। आंकड़ों की बाजीगरी की कवायद की जा रही है। 31 मार्च को वित्तीय वर्ष समाप्त हो जाएगा। सत्र समाप्त होते ही योजनावार बचा हुआ पैसा अधिकारियों को वापस करना होगा। यह देखते हुए आधे अधूरे कार्यों को भी अधिकारी पूरा दिखाने की कोशिश में हैं। इंदिरा और लोहिया आवास के तमाम पात्र ऐसे हैं, जिन्हें अभी दूसरी किस्त का पैसा नहीं मिला।
सूत्र बताते हैं कि अब सभी पात्रों के खाते में पैसा भेजने का सिलसिला शुरू हो गया है। कुछ सरकारी कर्मचारी खाते में पैसा भेजवाने के नाम पर अपनी जेब गर्म कर रहे हैं। स्वच्छता अभियान के लिए आया लाखों रुपया विभाग के खाते में डंप है। इस पर कोई ठोस काम प्रशासन नहीं कर सका है। शौचालय के भी सभी पात्रों को अब तक पूरा पैसा नहीं मिल सका। पशु पालन को बढ़ावा देने के लिए आई कामधेनु योजना भी यहां इस सत्र में परवान नहीं चढ़ सकी। डीपीआरओ की रिपोर्ट के मुताबिक हर ब्लाक में 50 हैंडपंप का रिबोर होना था।
विभाग से जुड़े लोग कहते हैं कि यह काम भी अधूरा है। एक अधिकारी की मानें तो यह सारे काम कागजों पर पूरा दिखाने की कोशिश की जा रही है। शायद यही वजह है कि अर्थ एवं संख्या विभाग इस माह शासन व मंडलायुक्त को भेजी जाने वाली कई रिपोर्ट बना चुका है, मगर रिपोर्ट फाइनल नहीं हो पा रही है। सीडीओ मनीष्ा कुमार ने बताया कि वित्तीय सत्र समाप्त होने में अभी काफी दिन है। जो काम अधूरे हैं उसे इस समय के बीच पूरा करा लिया जाएगा। जिस भी विभाग का काम अधूरा होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम को संस्तुति की जाएगी।