जिले में फायरिंग जोन न होने के कारण असलहे के लिए आवेदन करने व रिन्यूवल कराने के लिए शस्त्र लाइसेंसियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। समस्या को देखते हुए जिलाधिकारी ने सभी एसडीएम को फायरिंग जोन के लिए सई नदी के किनारे जमीन खोजने का निर्देश दिया है।
जनपद में बड़ी संख्या में शस्त्र लाइसेंसी हैं। इसके बाद भी करीब दस हजार से अधिक लोगों ने शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन कर रखा है। हाईकोर्ट के निर्देश पर नए लाइसेंसियों के साथ ही पुराने लाइसेंसियों के रिन्यूवल में भी शस्त्र धारकों को संबंधित पुलिस अधिकारियों के सामने फायर कराकर रिपोर्ट मिलने के बाद ही संस्तुति करना है। हाईकोर्ट के निर्देश के चलते नया शस्त्र लाइसेंस जारी नहीं किया जा रहा।
पुराने लाइसेंसियों की दिक्कत को देखते हुए और अधिवक्ताओं की घेराबंदी के बाद जिलाधिकारी डा. आदर्श सिंह ने फायरिंग जोन वाले क्षेत्र की तलाश शुरू कराई। इसके लिए सभी उपजिलाधिकारियों को आदेश भी दिया गया, लेकिन अभी तक ऐसी जमीन की तलाश नहीं हो सकी। जमीन न मिलने से फायरिंग टेस्ट के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस रिपोर्ट के बाद भी फायर टेस्ट के अभाव में कई शस्त्र लाइसेंस धारक की रिपोर्ट न लगने के कारण उन्हें कार्यालय से लेकर तहसील का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
पूर्व में पुलिस विभाग के कर्मचारी महीने भर में अधिकारियों के साथ निशाना साधने के लिए चांदमारी करने दहिलामऊ गायघाट रोड पर एकत्र होते थे। चांदमारी के दौरान छत्ता का पुरवा के ग्रामीण व मवेशी भी फायरिंग के दौरान छर्रे लगने से घायल हो जाते। इसके लिए ग्रामीणों ने विरोध किया। बाद में वहां चांदमारी बंद करा दी गई। जिलाधिकारी के निर्देश पर सप्ताह भर पूर्व उस जमीन की खोजबीन तहसील प्रशासन ने शुरू की तो पता चला कि उक्त जमीन किसानों की भूमिधरी है।फायरिंग जोन के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। ताकि शस्त्र लाइसेंसियों के साथ ही आवेदकों की समस्या का निराकरण हो सके। पूर्व में चांदमारी वाला स्थल किसानों का है। जल्द ही जमीन की तलाश पूरी होने की उम्मीद है।
जेपी मिश्र, उपजिलाधिकारी, सदर