नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलीपुत्री की पूजा हुई। इसके साथ ही घरों में कलश और अखंड ज्योति की स्थापना की गई। शक्तिपीठ मां बेल्हादेवी मंदिर में माता की एक झलक पाने के लिये आधी रात को ही सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु धाम में पहुंच गये थे। वे पंक्तिबद्ध होकर पट खुलने का इंतजार करने लगे। रात में तीन बजे से मां बेल्हा देवी का शृंगार शुरू हुआ। पांच बजे आरती के बाद दर्शन के लिए पट खोल दिया गया। मां का श्रृंगार रामपुर की चुनरी और मथुरा की माला से किया गया।
जयकारे लगाने के साथ ही लोगों ने मां के दर्शन किए। घरों में भी शैलपुत्री के रूप का पूजन विधि विधान से हुआ। वैदिक मंत्रों के बीच पंडितों ने यजमानों के यहां कलश की स्थापना कराई। लोगों ने दुर्गा सप्तशती का अखंड पाठ किया। आरती के बाद मां से परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा। पंडितों ने बताया कि शैलपुत्री के पूजन से परिवार में खुशहाली आती है। नवरात्र के पहले दिन देवी मंदिरों में श्रद्धा का सैलाब दिखा। हर कोई देवी के दर्शन को व्याकुल था। मां बेल्हा देवी के श्रंगार के लिये राजा पंडा की टीम लगी थी। रात को तीन बजे से मंदिर में चहल-पहल शुरू हो गई थी। माता का शृंगार उत्तर-प्रदेश के रामपुर जिले में बनी चुनरी और भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा से आकर्षक माला से किया गया। कारोबारी पप्पू दयाल का कहना है कि रामपुर समूचे एशिया में चुनरी के गढ़ के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। देशभर में यही से चुनरी जाती है। बेल्हा देवी के साथ-साथ गड़वारा मेें मां चंडिका, कुंडा की ज्वाला देवी और रानीगंज की चौहरजनदेवी मंदिर में भी धूम रही। दर्शन के लिये श्रद्धालुओं का ताता लगा रहा।