सृष्टि का विस्तार करने वाली मां कूष्मांडा के स्वरूप ने भक्तों का मनमोह लिया। रविवार को देवी के इसी स्वरूप की विधि विधान से पूजा की गई है। मां बेल्हा देवी में उमड़ी भक्तों की भीड़ की थकान और प्यास मां के दर्शन मात्र से ही गायब हो गई। मंदिरों में उनकी एक झलक पाने के लिए श्रद्धालु लालायित दिखे। नवरात्र पर्व पर चहुंओर का वातावरण भक्तिमय हो गया है। जगह-जगह मंदिरों पर बजते देवी गीत को सुनने के लिए बरबस ही लोगों के कदम ठिठक जाते हैं। सुबह और शाम घंटा-घड़ियालों और शंख की ध्वनि से आस-पास का वातावरण गुंजायमान हो जाता है। घर-घर में देवी की पूजा अर्चना का दौर चल रहा है।
मां कूष्मांडा के बारे में कहा जाता है कि इनका यह स्वरूप अन्नपूर्णा का है। प्रकृति का दोहन और लोगों को भूख-प्यास से व्याकुल देखकर मां ने शाकुंभरी का रूप धरा। इन्हाेंने ही सृष्टि का विस्तार किया है। आज के दिन मां बेल्हादेवी के प्रांगण में देवी के इसी स्वरूप की एक झलक पाने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु डटे रहे। कहा जाता है कि माता के इस रूप में तृप्ति और तुष्टि दोनो ही है। जो भी माता के इस स्वरूप का दर्शन करता है उसको सारे मनोरथ पूरे हो जाते हैं।