महुली डंडवा के करीब नगर पालिका ने कूड़ा निस्तारण के लिए डंपिग प्वाइंट बनाया है। शहर में हर दिन 40 टन कूड़ा निकलता है। जिसे महुली नए डंपिंग स्थल पर एकत्र किया जाता है। जल्द ही डंप कूड़े की छंटाई कर जैविक खाद बनाई जाएगी। जिसे किसानों को बेचा जाएगा। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना के तहत यह काम होगा। इससे नगर पालिका की आय भी बढ़ेगी।
कई सालों से नगर पालिका को कूड़ा डंपिंग जोन नहीं मिल रहा था। पहले पूरे केशवराय में जमीन चिह्नित हुई। इसके बाद शिवसत में जमीन का आवंटन हुआ, लेकिन दोनों जमीनों को कूड़ा डंपिंग क्षेत्र बनाने से मना कर दिया गया। स्थलीय निरीक्षण करने के लिए आवास विकास परिषद की इंजीनियरिंग टीम ने जायजा लिया था। स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत शासन ने शहर के कूड़ों के निस्तारण के लिए डंपिंग जोन बनाने का निर्देश दिया। काफी प्रयास के बाद नगर पालिका को राजस्व विभाग ने महुली डंडवा के करीब कूड़ा डंपिंग के लिए जमीन उपलब्ध कराई।
ग्वालियर की एसआरएमटी कंपनी को शहर व 25 वार्डों को कूड़ा डोर टू डोर कूड़ा उठाने का ठेका मिला है। कंपनी हर दिन करीब 40 टन कूड़ा उठाने का दावा करती है। उसे ट्रैक्टर व मैजिक से लादकर डंपिंग स्थल तक भेजा जाता है। वहां ंप हो रहे कूड़े से नगर पालिका जैविक खाद बनाने की तैयारी में है। सालिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना के तहत जैविक खाद बनाने की कवायद तेज हो गई है। मजदूरों को लगाकर कूड़ों की पहले छंटाई होगी। इसके बाद प्लास्टिक, कागज अलग होंगे।
सड़े गले फल, खाद्य सामग्री को अलग रखा जाएगा। वहां बनाए गए अलग-अलग गड्ढों में छंटाई के बाद ऐसे पदार्थ डाले जाएंगे। केमिकल डालकर जैविक खाद तैयार होगी। जिसे सूखने के बाद किसानों को बेचा जा सकेगा। नगर पालिका के ईओ मुदित सिंह का कहना है कि कूड़ा डंपिंग स्थल पर ही जल्द ही सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना के तहत जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए कागजी कार्रवाई पूरी की जा रही है।
रास्ते के अभाव में आ रही थी समस्या
शहर के कूड़े को डंप करने के लिए महुली डंडवा के करीब स्थल का चयन किया गया है। वहां तक अभी तक वाहन जाने में समस्या होती रही। केवल ट्रैक्टर से कूड़ा गिराया जाता रहा। अब नगर पालिका के कर्मचारियों की मदद से एसआरएमटी के कर्मचारी भी कूड़ा डालकर रास्ता तैयार कर रहे हैं। डंपिंग स्थल तक रास्ता बनने के बाद उस पर मिट्टी डाली जाएगी, ताकि छोटे वाहन भी वहां तक पहुंच सकें।
कर्मचारियों को मिलेगा प्रशिक्षण
कूड़े से खाद बनाने के लिए अलग से कर्मचारी लगाए जाएंगे। कूड़ों की छंटाई के लिए अलग मजदूर रहेंगे। जैविक खाद तैयार करने वाले कर्मचारियों की टीम अलग रहेगी। इसके लिए निजी संस्थाओं से मदद ली जा सकती है। जैविक खाद तैयार करने के लिए कुछ कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दिलाई जाएगी। इसके बाद उन्हीं लोगों से काम लिया जाएगा।
किसानों को बेची जाएगी सस्ते दर पर खाद
करीब दो माह के भीतर कूड़े से जैविक खाद तैयार हो सकेगी। अलग-अलग छंटाई के बाद कूड़ों को गड्ढों में डाला जाएगा। तरल पदार्थ निकालने की भी व्यवस्था रहेगी। तरल पदार्थ निकलने के बाद उसे दूसरे गड्ढे में डाला जाएगा। दो माह के भीतर जैविक खाद तैयार हो जाएगी। जिसे केवल किसानों को बेचा जाएगा। नगर पालिका पार्कों में लगाए गए पेड़ व पौधों में भी जैविक खाद का ही प्रयोग करेगी।