अंग्रेजों को धूल चटाने वाली रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा फांक रही धूल
झूले टूटे, पार्क में हर ओर गंदगी का अंबार
लोगों ने कर रखा है कब्जा, प्रतिमा पर धूल की जमी हैं परतें
19 नवंबर को है रानी लक्ष्मीबाई की जयंती, नगर पालिका बेपरवाह
प्रतापगढ़। अंग्रेजों को धूल चटाने वाली रानी लक्ष्मीबाई की जयंती 19 नवंबर को है। उनकी याद में शहर में नगर पालिका ने पार्क बनवाया है। जहां उनकी प्रतिमा लगी है और बच्चों को खेलने के साथ ही लोगों को घूमने के लिए पार्क बना है। पार्क में बने झूले टूटे हैं और प्रतिमा पर धूल की परतें जमी हैं। पार्क में लोगों ने अवैध रूप से कब्जा भी कर रखा है।
देश की स्वाधीनता के लिए अंग्रेजों से लोहा लेते हुए वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई ने खूब संघर्ष किया था। उनका जन्म 19 नवंबर 1835 के हुआ था। देश की दस जांबाज महिलाओं में शुमार रानी लक्ष्मीबाई की याद में नगर पालिका ने मीराभवन चौराहे के करीब रानी लक्ष्मीबाई पार्क का निर्माण कराया है। कुछ दिनों पूर्व ही नगर पालिका की ओर से लाखों रुपये खर्च कर पार्क का सौंदर्यीकरण कराया गया था। वहां बच्चों के खेलने के लिए झूले लगाए गए हैं। प्रतिमा भी स्थापित की गई है। शहर के रिहायशी इलाके में बने रानी लक्ष्मीबाई पार्क अब दुर्दशा का शिकार बना हुआ है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी नगर पालिका के जिम्मेदार उसे भूल बैठे हैं। बच्चे भी अब वहां खेलना पसंद नहीं करते। रात में पार्क मवेशियों का अड्डा बन जाता है। पार्क में लगी प्रतिमा पर धूल की मोटी परतें हैं। भले ही नगर पालिका शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने का दावा करती है लेकिन हकीकत रानी लक्ष्मीबाई पार्क समेत अन्य छोटे व बड़े पार्कों को देखने के बाद मिल जाता है। शहर के शहीद उद्यान व न्यू कालोनी बाबागंज स्थित पार्क के अलावा सभी की दशा बद से बदतर देखने को मिल रही है। 19 नवंबर को भले ही रानी लक्ष्मीबाई की जयंती है। शहर उनकी याद के लिए बने पार्क व प्रतिमा को साफ सुथरा करना भी नगर पालिका प्रशासन बेहतर नहीं समझा। जयंती में महज दो दिन शेष बचे हैं। देश की आजादी के लिए अंग्रेजों को नाको चना चबाने के लिए मजबूर कर देनी वाली रानी लक्ष्मीबाई की याद में बने पार्क की दशा सुधारने के लिए नगर पालिका के साथ ही हर किसी को आगे आना होगा।
पार्क से झूले व पाइप तक गायब
शहर के मीराभवन चौराहे के करीब रानी लक्ष्मीबाई पार्क का लाखों रुपये से सौंदर्यीकरण कराया गया था। पार्क में बच्चों के लिए झूले लगवाए गए थे। ताकि सुबह व शाम बच्चों को लेकर नागरिक खुली हवा में सांस ले सकें। नगर पालिका की लापरवाही से उसकी योजना चंद दिनों में ही ध्वस्त हो गई। देखभाल के अभाव में पार्क से झूले, पाइप, जंजीर समेत अन्य संसाधन गायब हो गया। पार्क पर लगा गेट भी गायब है। रानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा की तलवार भी नशेड़ियों के भय से हटा दिया गया है।
नशेड़ियों की रात में सजती है महफिल, बना है कूड़ा घर
रानी लक्ष्मीबाई पार्क में नशेड़ियों की रात में महफिल सजती है। चहरदीवारी पर भले ही गेट लगाया गया था लेकिन वह कुछ दिनों बाद ही नशेड़ियों की भेंट चढ़ गया। हर कोई रात में पार्क की ओर जाने से बचता है। चर्चाओं की मानें तो दिन भी नशेड़ी पार्क में जमे रहते हैं। पार्क में हर ओर गंदगी फैली हुई है। आसपास के लोग तो पार्क के कोनों को कूड़ाघर बना रखा है। मकानों के छतों से लोग कूड़ा पालीथिन में भरकर फेंक देते हैं। सफाईकर्मी भी गंदगी साफ करने से परहेज करते हैं। इसका खामियाजा इलाके के लोगों को उठाना पड़ रहा है। जहां कभी पार्क में भीड़ देखने को मिलती थी। अब वहां सन्नाटा पसरा रहता है।
पार्क की दशा सुधारने के लिए प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। जयंती के पहले नगर पालिका द्वारा पार्क की साफ सफाई व अतिक्रमण हटाने की व्यवस्था करा ली जाएगी। पार्क को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा।
मुदित सिंह, ईओ नगर पालिका
मीराभवन स्थित रानी लक्ष्मीबाई पार्क में लगी प्रतिमा से गायब तलवार।- फोटो : PRATAPGARH