शासन के निर्देश के बाद भी सड़कों, खेत खलिहानों व बाजारों में घूम रहे आवारा पशुओं को संरक्षित नहीं किया जा सका। जिम्मेदार अधिकारी इसमें पूरी तरह नाकाम रहे। तकरीबन चार हजार से अधिक आवारा मवेशी छुट्टा घूम रहे हैं।
आवारा पशुओं को संरक्षित करने के लिए जिले में छह स्थाई, 45 अस्थाई, आठ कान्हा गोशाला और चार कांजी हाउस का निर्माण कराया गया है। जिला पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका के साथ ही ग्राम पंचायतों में बने गो संरक्षण केंद्रों में पशु चिकित्सकों को उनकी देखभाल की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके बावजूद शहर की सड़कों, चौराहों व बाजारों से लेकर गांव में खेत खलिहानों में आवारा मवेशी खुले घूम रहे हैं।
इनको हर हाल में 31 मार्च तक संरक्षित करने का निर्देश शासन ने जिम्मेदारों को दिया था। लेकिन समय सीमा के भीतर इन्हें संरक्षित नहीं किया जा सका।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को पांच अप्रैल तक की मोहलत दी है। अब देखना यह है कि अधिकारी इस दिशा में कितना कारगर कदम उठाते हैं।