जिले में मानसून आने में हो रही देरी से धान की फसल पर संकट गहरा गया है। बरसात नहीं होने से किसान जहां खेतों की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं, वही भीषण गर्मी और तेज धूप से धान की नर्सरी सूखने के कगार है। हालांकि मंगलवार की दोपहर आसमान में बादल उठने से किसानों के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई है।
जिले में प्राय: 23 जून तक मानसून आ जाता है, मगर इस वर्ष मानसून आने में हो रही देरी से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। जिले में 97,428 हेक्टेयर में धान की रोपाई होती है। किसानों ने धान के रोपाई के लिए पिछले महीने ही नर्सरी डाल रखी है। अगेती फसलों के लिए धान की नर्सरी तैयार भी हो गई है। मगर बरसात नहीं होने के कारण खेतों की तैयारी नहीं हो पा रही है। इससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। जिले की अधिकांश नहरों में पानी नहीं है, और गांव में महज चार घंटे बिजली मिल रही है। इससे किसान किस तरह खेतों की तैयारी और धान की रोपाई करें।
मंगलवार को दोपहर बाद आसमान में बादल उठने से बरसात की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि जिले के कई इलाकों में धूल भरी आंधी और बूंदाबांदी हुई है। फिलहाल अगर 28 जून तक मानसून नहीं आता है, तो किसानों की परेशानी और बढ़ जाएगी।
कृषि विभाग ने किसानों के मोबाइल पर भेजा मैसेज
कृषि और उद्यान विभाग में रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानों के मोबाइल पर बरसात होने का मैसेज आ रहा है। मोबाइल पर जो मैसेज आया है, उसके मुताबिक 27 से 30 जून के मध्य बरसात होने की संभावना प्रकट की गई है। इस मैसेज से किसानों की उम्मीद जगी है।
05 से 25 जुलाई के बीच होती है धान की रोपाई
जिले के किसान 05 से 25 जुलाई के बीच धान की रोपाई करते हैं। अगेती फसलों के लिए पांच जुलाई से धान की रोपाई प्रारंभ हो जाती है। जबकि अन्य प्रजातियों के लिए रोपाई की अंतिम तिथि 25 जुलाई होती है।
मानसून आने में देरी अवश्य हुई है, मगर इससे किसानों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। पहली बरसात होते ही किसानों को अपनी तैयारी प्रारंभ कर देनी है। उत्पादकता का भरपूर लाभ लेने के लिए किसानों को समय से धान की रोपाई करनी चाहिए।
डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी