जर्जर हो चुके बस स्टैंड को मॉडल बनाने के लिए शासन ने करोड़ों का बजट पास किया, लेकिन कार्यदायी संस्था अधिकारियों की जेब गर्म कर घटिया सामग्री से निर्माण कार्य करवा रही है। मानक के विपरीत मिट्टी पर हल्की सी गिट्टी डालकर उसी पर फर्श तैयार की जा रही है। शासन ने प्रतापगढ़ बस स्टैंड को मॉडल बनाने की मंजूरी दे दी। 22 करोड़ की लागत से यह मॉडल डिपो तैयार हो रहा है। कार्यदायी संस्था नियम कानून को ताक पर रखकर निर्माण कार्य करवा रही है। बगैर किसी नीलामी के ही पुराने भवन को तोड़कर उसकी जर्जर ईंट को निकाल लिया गया। उसी ईंट से भवन का नींव से लेकर दीवार तैयार कर दी गई।
अब बारी आई फर्श बनाने की तो कार्यदायी संस्था ने पैसा बचाने के चक्कर में मिट्टी डलवा कर उस पर पहले पानी भरवा दिया। इसके बाद हल्की सी पुराने ईंटों को ही तोड़वा कर गिट्टी बनवाकर डालकर कुटाई करवा रही है। घटिया मसाले से फर्श का निर्माण किया जा रहा है। इससे सरकार की मंशा पर पानी फिर जाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि विभागीय अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। एआरएम रवींद्र से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी कई बार विभाग के आलाधिकारियों को दी गई है। मगर वे कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। हमारी जिम्मेदारी मात्र बस का संचालन का है। मै बस का संचालन करवा रहा हूं।