शासन के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने बीते जनवरी माह में स्कूलों में कैंप लगाकर बच्चों को एमआर का टीका लगा था। मिजिल्स रूबेला टीकाकरण का प्रचार-प्रसार करने में विभागीय अफसरों ने जमकर खेल किया। 70 लाख रुपये दबाकर बैठ गए। जानकारी होने पर शासन ने इस मामले में जांच बैठा दी है। जांच तक ठेकेदार के भुगतान पर भी रोक लगा दी गई है।
जिले के 12 लाख 26 हजार 863 बच्चों को एमआर का टीका लगाने के लिए शासन ने स्वास्थ्य विभाग को लक्षय दिया था। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने टीकाकरण का न तो प्रचार-प्रसार किया और न ही शासन के आदेश पर पोस्टर और बैनर बनवाए। इतना ही नहीं इनफार्मेशन कार्ड भी नहीं बनवाया गया।
शासन ने इन कार्यों के लिए ई-टेंडर निकालने के लिए कहा था, मगर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बगैर टेंडर निकाले एक संस्था को प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी दे दी। प्रचार-प्रसार के अभाव में महज 11 लाख 65 हजार बच्चों को ही टीका लग सका। बहुत से बच्चे टीकाकरण से वंचित रह गए। शासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच बैठा दी है।
इस योजना का प्रचार-प्रसार किया गया है। शासन की ओर से मिली गाइड लाइन पर काम किया गया है। जांच हमारे खिलाफ नहीं, बल्कि ठेकेदार के खिलाफ हो रही है।जांच में जो दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई शासन स्तर से होगी।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ।