नसबंदी कराने में पुरुषों से आगे महिलाएं हैं। बीते तीन साल का आकड़ा देखा जाए तो जमीन और आसमान का अंतर सामने आ रहा है। 8,713 महिलाओं के सापेक्ष महज 71 पुरुषों ने ही नसबंदी कराई है। नसबंदी कराने में पुरुष हर साल महिलाओं के पीछे रहे हैं। जबकि शासन की ओर से पुरुष नसबंदी पर ढाई हजार रुपये तो महिला नसबंदी पर दो हजार रुपये ही प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके बावजूद जब नसबंदी कराने की बारी आती है तो पुरुष महिलाओं को आगे कर खुद पीछे हो जाते हैं।
परिवार कल्याण कार्यक्रम को छोड़कर बाकी अन्य कार्यक्रमों में पुरुषों की हिस्सेदारी महिलाओं से ज्यादा होती हैं। जब नसबंदी कराने की बात आती है तो पुरुष अपनी पत्नी को आगे कर खुद डर बस पीछे हो जाते हैं। यदि अप्रैल से अबतक देखा जाए तो 365 महिलाओं में महज चार पुरुष नसबंदी कराने के लिए अस्पताल पहुंचे हैं। सीएमओ डॉ. जीएम शुक्ल ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है, लेकिन परिणाम उसके अनुरूप नहीं निकल रहे हैं। इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों पर नजर डालें तो वर्ष 2022-23 में 4066 महिलाओं के सापेक्ष 28 पुरुषों ने नसंबदी कराई। वर्ष 2023-24 में 4,282 महिलाओं के सापेक्ष 39 पुरुषों और वर्ष 2024-25 में अप्रैल से अबतक 365 महिलाओं ने नसबंदी कराई। वहीं, पुरुषों की संख्या महज चार रही।
महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को प्रोत्साहन राशि देती है सरकार
सीएमओ डॉ. जीएम शुक्ल ने बताया कि पहले जो नसबंदी होती थी उसमें तीन से चार दिनों तक भरी काम करने में रोका जाता था, लेकिन आज अब नसबंदी के चार घंटे के बाद महिला हो या फिर पुरुष कोई भी कार्य कर सकता है। उन्होंने कहा कि पुरुषों में भ्रम होता है कि नसबंदी कराने से उनकी यौन शक्ति कम हो जाती है, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं होता है।