सौभाग्य योजना के तहत जिले के करीब 557 मजरे ऐसे थे जहां विद्युतीकरण कार्य पूरा नहीं हो सका था। शिकायत पर आला अफसरों ने इसे प्राथमिकता के तौर पर पूरा करने का निर्देश दिया था, मगर जिले के अफसर इसे लेकर लापरवाह बने हैं। समीक्षा करने आईं एमडी अपर्णा यू ने जांच की तो अफसरों की पोल खुल गई। उन्होंने जल्द कार्य पूरा करने का निर्देश दिया, मगर अल्टीमेटम के बाद भी ठेकेदार से लेकर अफसर तक ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सौभाग्य योजना के तहत जिले के बिजली से वंचित मजरों में विद्युतीकरण की पहल की गई थी।
इसके तहत जिले के 6 हजार से अधिक ऐसे मजरों को चिह्नित किया गया जो बिजली से संतृप्त नहीं हो सके थे। विद्युतीकरण के लिए कुल 389 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ। विद्युतीकरण की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था बजाज को दी गई। इसके लिए निर्धारित टाइम लाइन दी गई। इसके अनुरूप कार्यदायी संस्था ने कार्य पूरा नहीं किया। शासन के दबाव के चलते अफसरों ने बगैर कार्य पूर्ण किए ही जिले को सौभाग्य घोषित कर दिया। मगर इसके बाद जब अधूरे कार्यों की शिकायत शुरू हुई तो कार्यदायी संस्था व अफसरों की किरकिरी होने लगी।
500 से अधिक ऐसे मजरे पाए गए जहां विद्युतीकरण का कार्य अधूरा पाया गया था। कहीं पोल गिरे थे तो कहीं तार। आला अफसरों ने इसको संज्ञान में लिया और अधूरे मजरों को रोशन करने का आदेश दिया। निर्देश पर कार्यदायी संस्था ने छिटपुट कार्य शुरू किया और फिर से ठप कर दिया। जबकि अफसर दावा करते रहे कि विद्युतीकरण का कार्य पूरा हो गया है।
इस बीच एमडी अपर्णा यू का जिले में दौरा हुआ। बिजली विभाग के अफसरों के साथ उन्होंने समीक्षा बैठक की। इस दौरान विद्युतीकरण में बरती जा रही लापरवाही भी सामने आई थी। इसे लेकर उन्होंने अफसरों व कार्यदायी संस्था को कड़ी फटकार लगाई थी। विद्युतीकरण का कार्य पूरा करने का निर्देश दिया था, मगर अभी भी कार्यदायी संस्था व अफसरों पर एमडी के आदेश का भी कोई असर नहीं हैं।