जिला अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में दस महीने से भर्ती गबन के आरोपी बैंक मैनेजर को शनिवार को अस्पताल प्रशासन ने जेल भेज दिया। ’अमर उजाला’ में इससे संबंधित खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद आननफानन में अस्पताल से जेल शिफ्टिंग की कार्रवाई की गई। दस महीने से बैंक मैनेजर को ठीक नहीं कर पा रहे डॉक्टरों ने शनिवार को उन्हें फिट बता दिया। शुक्रवार को उनके आपरेशन की बात कहने वाले सीएमएस ने भी उनके स्वस्थ होने पर अपनी मुहर लगा दी। लखनऊ के आशियाना के रहने वाले सुनील चतुर्वेदी जिला जेल में निरुद्ध हैं। वह प्रतापगढ़ जिले में पंजाब नेशनल बैंक की कुंडा शाखा में मैनेजर थे। आरोप है कि उन्होंने फर्जी नाम-पते पर 25 लोगों के नाम एक करोड़ 30 लाख का लोन पास करा दिया।
इस मामले में उनके खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस ने सुनील को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। एक जून 2016 को बीमारी की बात कहकर जेल प्रशासन ने उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल भेज दिया था। अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें प्राइवेट वार्ड में रखा गया। दस माह से वह वहीं ‘स्वास्थ्य लाभ’ ले रहे थे। दस माह से डॉक्टर उनका मर्ज ठीक नहीं कर पा रहे थे। उनकी बीमारी को लेकर भी डॉक्टर अलग-अलग बयान दे रहे थे। सीएमएस शुगर और हृदय की बीमारी के साथ आपरेशन होने की बात कह रहे थे। वह सुनील की हालत गंभीर बता रहे थे।
शनिवार के अंक में ‘अमर उजाला’ ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया। खबर छपने के बाद अस्पताल प्रशासन ने जल्दबाजी में बैंक मैनेजर को अस्पताल से जेल शिफ्ट करा दिया। सीएमएस महेन्द्र विक्रम सिंह का कहना है सुनील का जिस दिन ऑपरेशन हुआ था, उसे उसी दिन जेल भेजा जा सकता था। शुगर और हार्ट का मरीज होने के कारण रोका गया था। शनिवार को पट्टी बदलवाई गई तो घावसूखा हुआ था। इसलिए उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। उधर, सुनील का इलाज करने वाले डॉक्टर मनोज खत्री काकहना है कि उन्होंने काफी दिनों पहले ही मर्ज पर काबू पा लिया था। ऑपरेशन के चलते सीएमएस ने सुनील को रोक रखा था।