गौरा विकास खंड के मिडिल स्कूल रोहकला खुर्द के भवन निर्माण में कमीशन के चक्कर में मानक की अनदेखी की गई थी। भवन को विभाग के ही एक शिक्षक ने बनवाया था। लेंटर पड़ते समय ‘ठेकेदार’ बने शिक्षक ने सरिया के स्थान पर बांस की पट्टियां डलवाई थीं। इसके चलते मात्र छह साल में ही विद्यालय का भवन जर्जर हो गया और बृहस्पतिवार को उसकी छत ढह गई।
गौरा विकास खंड के मिडिल स्कूल रोहकला खुर्द के भवन का निर्माण वर्ष 2011-12 में कराया गया था। विभाग के ही एक शिक्षक को भवन प्रभारी बनाकर अफसरों ने जमकर कमीशनबाजी का खेल किया। इसका परिणाम रहा कि छह साल में ही स्कूल जर्जर हो गया है। बृहस्पतिवार को भवन की छत का एक हिस्सा गिरने के बाद स्कूल को प्राइमरी स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है। दरअसल, भवन का एक हिस्सा गिरने पर खुलासा हुआ था कि छत में सरिया के स्थान पर बांस की पट्टियां डाली गई हैं। पानी का रिसाव होने के कारण बांस की पट्टियां सड़ गई और छत का एक कोना ढह गया। बीएसए के निर्देश पर खंड शिक्षा अधिकारी विमलेश तिवारी मौके पर पहुंचे और फोटो खींचने के साथ ही गहराई से जांच की। फिलहाल अभी तक जांच रिपोर्ट बीएसए कार्यालय में नहीं दी है, मगर वर्तमान में बगल के स्कूल में तैनात भवन प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी पर नेताओं से दबाव बनवा रहा है कि रिपोर्ट उनके पक्ष में ही भेजी जाए। बीएसए अशोक कुमार सिंह ने बताया मात्र छह साल में ही भवन का हिस्सा गिरने से स्पष्ट है कि भवन निर्माण में व्यापक पैमाने पर अनियमितता बरती गई है। उन्होंने जांच रिपोर्ट आते ही कार्रवाई करने की बात कही है।