जिले की 337 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां अभी विकास कार्य प्रारंभ ही नहीं हुआ है। इसमें से अधिकांश ग्राम पंचायतों में प्रधानों और ग्राम पंचायत अधिकारियों के बीच सामंजस्य स्थापित नहीं होने के कारण हो रहा है। इस दिशा में अधिकारियों का भी प्रयास सार्थक नहीं हो रहा है। हालांकि इस वर्ष जॉबकार्ड धारकों को एक सौ दिन का ही रोजगार मिलेगा।
योजना के तहत काम करने वाले जाबकार्डधारकों का पैसा पहले ब्लॉक से हो कर मजदूरों के खाते में जाता था। लूटखसोट पर ब्रेक लगाने के उद्देश्य से सरकार इस नियम में परिवर्तन कर दिया। अब पैसा काम करने वाले मजदूरों के खाते में सीधे सरकार भेजती। ब्लाक व ग्राम पंचायतों को काम करने वाले मजदूरों का दिनवार ब्योरा योजना की साइट पर लोड करना होता। जानकार बताते हैं कि जब से ये पैसा सीधे मजदूरों के खाते में जाने लगा ग्राम पंचायतें व ब्लॉक स्तरीय अधिकारी उदासीन हो गए हैं। यही वजह है कि जिले के 337 ग्राम पंचायतों में अभी कार्य नहीं प्रारंभ हुआ है। ग्रामीण इलाकों में कार्य प्रारंभ नहीं होने का दूसरा कारण यह भी माना जा रहा है, प्रधानी की कुर्सी हथियाने वाले मुखिया पूर्व में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी के साथ काम करने को तैयार नहीं है, बल्कि वह नए चेहरे को देखना चाहते हैं। मगर अधिकारी उनके इस कार्य में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
बिहार, मानधाता, सांगीपुर, बाबागंज, सदर, बेलखरनाथधाम, संग्रामगढ़ , लक्ष्मणपुर, संडवा चंद्रिका, आसपुर देवसरा ब्लाक को मिला कर करीब 337 ग्राम पंचायतों में मनरेगा का कार्य प्रारंभ ही नहीं हुआ है। इधर डीसी मनरेगा जनार्दन यादव ने बताया कि ग्राम प्रधान के कार्यभार ग्रहण करने के बाद से ही मनरेगा का कार्य कराने का निर्देश दिया गया है।