बरसात के बाद पनप रहे मच्छर से संक्रामक बीमारियों के साथ ही मलेरिया होने का खतरा बना रहता है। मगर सरकारी अस्पतालों में मलेरिया जांच के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। यह जांच मरीजों को बाहर निजी पैथलॉजी से कराना पड़ता है। मरीजों को अधिक खर्च करना पड़ता है। बरसात के बाद जगह-जगह जलभराव से मच्छरों की भरमार हो गई है। शाम सात बजे के बाद शहरियों के साथ गांव के लोग मच्छर के हमले से परेशान हो उठते हैं। मच्छर काटने से लोग मलेरिया जैसी बीमारी की चपेट में आकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। यहां चिकित्सक इलाज करने के पहले रक्त की जांच करवाते हैं।
जिसमें टायफाइड, मलेरियां व पीलिया जैसी बीमारी की जांच अनिवार्य होती है। जिला अस्पताल में मलेरिया किट न होने के कारण मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है। ऐसे में मरीजों को अस्पताल के सामने खुले प्राइवेट पैथलॉजी का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग फागिंग की व्यवस्था अभी तक शुरू नहीं करा सका। जबकि जिला अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डा. मोहित शुक्ला ने बताया कि बीते चार दिनों से मलेरिया व टायफाइड जैसे बीमारी से ग्रसित बच्चे ज्यादा आ रहे हैं। चार दिनों के भीतर वह ऐसी बीमारी से पीड़ित तीस से अधिक बच्चों का इलाज कर चुके हैं। वहीं डॉक्टर पीएस मिश्र ने बताया कि बरसात के बाद से अब तक मलेरिया से ग्रसित 10 महिला 7 पुरूष का इलाज कर रहे हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग अनजान बना हुआ है।