भरत मिलाप के बाद दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का कार्यक्रम शुरू हो गया। रविवार को जय मां दुर्गा पूजा समिति चिलबिला तालाब, भैरोपुर और बाबागंज में विराजी दुर्गा जी की प्रतिमाओं का विसर्जन गाजे-बाजे के साथ धूमधाम से किया गया। चिलबिला की दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन पास के पौराणिक तालाब में मंत्रोच्चारण के बीच हुआ। बाकी का सई नदी के किनारे विसर्जन हुआ।
विसर्जन के पूर्व मां देवी व पंडाल में विराजमान बाकी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का आरती उतारी गई। आयोजक रोशन लाल उमरवैश्य ने बताया कि भगवान शंकर के संरक्षकतत्व में हनुमान के मार्ग दर्शन में यह पूजा पंडाल गत बीस साल से संचालित हो रहा है। दुर्गा की प्रतिमा स्लेरी पाइप से तैयार की गई थी। इस दौरान अध्यक्ष रामचंद्र भारती, राम गोपाल, कपिल आदि श्रद्धालु नाचते-गाते विसर्जन में शामिल हुए।
प्रतिमाओं का हुआ विसर्जन
संडवा चंद्रिका (ब्यूरो)।नवरात्र में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा रविवार को गाजे-बाजे के साथ विसर्जित कर दी गई। मां के जयकारे के साथ अबीर-गुलाल उड़ाते चल रहे युवा डीजे की धुन पर थिरकते रहे। नवरात्र के प्रतिपदा को पंडालों में विराजने वाली मां दुर्गा रविवार को अश्विन पूर्णिमा के साथ ही विदा हो गई। क्षेत्र के छतरपुर शिवाला में स्थापित मां दुर्गा की विशालकाय प्रतिमा का विसर्जन रविवार को हो गया। पंडाल से मूर्ति उठाने के पहले विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। मां का जयकारा लगाते हुए चल रहे भक्त राहगीरों को भी अबीर-गुलाल से सराबोर कर रहे थे। किठावर बाजार स्थित सई नदी में धूमधाम से भवानी को विदा किया गया। गौराडांड मोड़ पर स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन धूमधाम से हुआ।