लोहिया आवास के रुपये बांटने में अफसर खेल कर रहे हैं। डीएम की अनुमति लिए बगैर ही परियोजना निदेशक ने सांगीपुर और शिवगढ़ के नौ लाभार्थियों के खाते में आवास की पहली किस्त भेज दी। मामला डीएम के संज्ञान में आया तो पीडी ने अपनी गर्दन फंसते देख लाभार्थियों के खाते से धनराशि मंगाने की कवायद शुरू कर दी है।
वित्तीय वर्ष 2014-15 में सांगीपुर विकास खंड के पूरेभगवत और शिवगढ़ की संडौरा ग्राम पंचायत को लोहिया गांव चुना गया। परियोजना निदेशक ने 10 अक्तूबर 2014 को 62 लाभार्थियों को 1,22,500 रुपये पहली किस्त के रूप में भुगतान कर दिया। पहली किस्त पाने वाले लाभार्थियों की सूची में पीडी के साथ ही बीडीओ और सीडीओ के हस्ताक्षर हैं। 16 नवंबर 2014 को जिलाधिकारी ने लाभार्थियों की जो सूची जारी की उसमें 86 लोगों के नाम तो हैं मगर उनमें सांगीपुर के आठ और शिवगढ़ के एक लाभार्थी का नाम नहीं है।
इसकी जानकारी पर डीएम ने परियोजना अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब कर लिया। इस पर अफसरों ने कार्रवाई से बचने के लिए बैंकों को पत्र भेजकर रुपये के भुगतान पर रोक लगा दी है। इस बाबत परियोजना निदेशक रंजीत सिंह ने पहले तो यह कहा कि अपात्रों के खाते में धनराशि चली गई थी, इसलिए मंगाने की कार्रवाई की जा रही है, इसके बाद बोले, डीएम की दूसरी सूची में छूटे हुए लोगों के नाम शामिल हैं। जबकि वास्तविकता तो यह है कि डीएम ने दूसरी सूची जारी ही नहीं की है।