लालगंज। बेमौसम बरसात से किसानों की फसल लगभग बर्बाद हो गई है। इसके चलते वह आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। अब बैंकों से ऋण लेने वाले किसानों पर पैसा जमा करने का दबाव डाला जा रहा है।
क्षेत्र के पूरेबंशी के किसान अखिलेश कुमार का कहना है कि गेहूं की फसल बर्बाद होने से वह केसीसी का ऋण नहीं जमा कर पा रहा है। बैंक वाले आए दिन उस पर ऋण जमा करने का दबाव डाल रहे हैं। इसी तरह पूरे टीकाराम के सुरेश गुप्ता का कहना है कि उसने बैंक से खेती के लिए ऋण लिया था। वह ऋण जमा करने के लिए बैंक पहुंचा और अधिकारियों से बकाया जमा करने की समय सीमा बढ़ाए जाने की गुहार लगाई।
लेकिन बैंक कर्मियों ने उसे ऋण जल्दी जमा करने का फरमान सुना दिया। भवराम बोझी पूरे पौलहा के किसान रामबरन वर्मा पर भी बैंक से लिये गए ऋण को जल्द जमा करने का दबाव डाला जा रहा है। कुछ ऐसा ही हाल अझारा गांव के देवनाथ मिश्रा का है। इनका कहना है कि फसल तो पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। पैदावार ही एकमात्र कमाई का जरिया था। जब फसल ही नहीं हुई तो वह बैंक से लिए गए कृषि ऋण को कहां से जमा करेंगे।
विधानसभा के चुनाव में सपा सरकार ने घोषणा पत्र में किसानों के पचास हजार तक के बैंकों से लिए ऋण को माफ करने का वादा किया था। लेकिन सरकार बनते ही यह बात ठंडे बस्ते में चली गई। क्षेत्र के अझारा निवासी किसान कृष्णानन्द मिश्र, पूरे रामचंद्र के विकास कुमार, बेलहा के कौशलेश सिंह, खानापट्टी के पारसनाथ मौर्या, खालसा सादात के सैयद सफीक,शहजाद अंसारी, सगरा सुंदरपुर के गंगा शिव आदि का कहना है कि प्रदेश सरकार ने घोषणा पत्र में किए गए वादे को पूरा नहीं किया।
इसके साथ ही क्षेत्र के अन्य किसानों में भी सरकार के वादाखिलाफी को लेकर आक्रोश व्याप्त है। किसानों का कहना है कि सरकार के वादे के चलते बहुत से किसानों ने बैंकों से लिया गया ऋण जमा नहीं किया। आस थी कि ऋण माफ हो जाएगा। ऋण तो माफ नहीं हुआ, लेकिन ऋण का ब्याज चार गुना बढ़ गया।