सूखे आंसुओं के बीच तीसरे दिन अधिवक्ता का हुआ अंतिम संस्कार
पत्नी रोते हुए हो गई बेहोश, प्रशासन ने ली राहत की सांस
सोमवार को हुई थी गोली मारकर हत्या, दो दिनों तक शव घर पर ही था रखा
जेठवारा/डेरवा। सूखे आंसुओं के बीच तीसरे दिन बुधवार को अधिवक्ता व विहिप जिलाध्यक्ष ओम मिश्र के शव का अंतिम संस्कार हो सका। घर से शव अंतिम संस्कार के लिए निकालते समय पत्नी रोते हुए बेहोश हो गई। सुरक्षा के बीच शव को श्रृंग्वेरपुर घाट ले जाया गया। अंतिम संस्कार होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।
विहिप जिलाध्यक्ष व अधिवक्ता ओम मिश्र की हत्या के बाद आक्रोशित परिजन व ग्रामीण शव को घर उठा ले गए थे। प्रशासनिक अमले की बातचीत बेनतीजा रही। जिसके चलते शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका। घरवाले सीएम को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े थे। यहां तक कि भाजपा नेताओं के साथ प्रभारी मंत्री स्वाति सिंह को बैरंग लौटना पड़ा। शाम को परिजन शव लेकर कचहरी पहुंचे। जहां मांगों को पूरा करते हुए जिलाधिकारी मार्कण्डेय शाही ने मृतक अधिवक्ता के चारों भाइयों को असलहों का लाइसेंस तत्काल जारी किया। पंद्रह लाख रुपये व सांसद विनोद सोनकर ने अपनी निधि से ओम के इंटर कालेज में पांच लाख की लागत से कक्ष बनाने के लिए धनराशि देने की बात कही। पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने नामजद आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। जिसके बाद पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज सकी। आधी रात को पोस्टमार्टम के बाद शव घर ले जाया गया। वहां से बुधवार की सुबह पुलिस सुरक्षा के बीच शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। तीन दिन से लगातार परिजन शव को देखते ही रोते बिलखते रहे। सूखे आंसुओं के बीच परिजनों ने अंतिम विदाई दी। शव का अंतिम संस्कार होने की खबर मिलने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली।
बेटा, पापा अब कभी लौटकर नहीं आएंगे
बुधवार को अधिवक्ता ओम मिश्र के शव को अंतिम संस्कार के लिए तैयार किया जा रहा था। अंतिम विदाई देने के लिए परिवार के लोगों के साथ ही रिश्तेदार भी रोते बिलखते रहे। इस बीच दोनों बेटों को गले से लिपटाकर रोते हुए पत्नी नीलम ने कहा कि बेटा, पापा अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। यह सुनते ही वहां मौजूद लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े।
शव देखने के बाद हर किसी का चेहरा गुस्से से लाल
बुधवार को अधिवक्ता ओम मिश्र का शव देखने के बाद हर किसी का चेहरा गुस्से से लाल हो जाता रहा। सिर व सीने में लगी गोली के घाव देखकर हर कोई आक्रोशित होकर हत्यारों को कोसने लगता। मासूम बच्चों के साथ ही पत्नी पर नजर पड़ते ही लोग उनके भविष्य को लेकर चिंतित दिखाई पड़ते।
महेशगंज थाने के कलिकापुर ढिंगौसी में अधिवक्ता ओम मिश्रा का शव अंतिम संस्कार को ले जाते परिजन।- फोटो : PRATAPGARH