तहसील क्षेत्र के तीन दर्जन से अधिक राजस्व गांवों के किसानों को 2014-15 में आपदा से खराब हुई गेहूं की फसल का मुआवजा अब तक नहीं मिल सका है। फसल बर्बादी के बाद घोषित हुए मुआवजे का समय 19 माह से अधिक बीत गया लेकिन मुआवजे की बाट किसान जोहते ही रह गए। शासन भी इसे भूल गया। इसके बाद धान की आंशिक फसल बारिश अधिक बारिश के कारण खराब हुई थी। अब उसका पैसा वितरित किया जा रहा है।
तहसील क्षेत्र के करीब पांच सौ से अधिक राजस्व गांवों में 2014 में रबी की फसल पर मौसम ने कहर बरपाया था। फसल बर्बादी के सदमे से कई किसानों की असमय मौत हो गई थी। प्रदेश की सपा सरकार ने तबाह हुए किसानों पर मरहम लगाते हुए मुआवजे की घोषणा की तो केंद्र की भाजपा सरकार ने भी मुआवजे की रकम बढ़ाते हुए अपना केन्द्रांश दिया। तहसील क्षेत्र के बाबागंज, कुण्डा, कालाकांकर तथा बिहार ब्लाक के अधिकांश गांवों में मुआवजे की राशि का वितरण भी हुआ लेकिन 41 राजस्व गांवों में किसानों को अभी तक फूटी कौड़ी नसीब नहीं हुई। किसानों ने कई बार तहसील प्रशासन सहित जिलाधिकारी से भी मुआवजा दिलाए जाने की गुहार लगाई लेकिन अफसर पैसा न होने का रोना रोते रहे।
हालात से समझौता कर किसानों ने सूदखोरों के सहारे धान की फसल लगाई जरूर लेकिन वह भी सूखे से चौपट हो गई। ऐसे में किसानों के सामने फिर से समसया खड़ी हो गई। अभी हाल ही में जिले पर धान की फसल का मुआवजा आया था। डिमांड के अनुसार तहसील के किसानों के खाते में भी धान की खराब हुई फसल का मुआवजा दिया जा रहा है लेकिन पूर्व में रवी की खराब हुई फसल का मुआवजा शायद सरकार भी भूल चुकी है।