जेसीबी से होने वाले अवैध खनन से बने गड्ढे बच्चों की जान के दुश्मन बन गए हैं। बरसात से भरे पानी के कारण बच्चे इसकी गहराई का अंदाजा न लगा पाने के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं। बावजूद इसके प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। शासन ने जेसीबी से काम कराने पर रोक लगाई है। अगर कोई अपना निजी काम कराता भी है तो तीन फिट से अधिक का गड्ढा नहीं खोद सकता। बावजूद इसके नहर, नदी की मिट्टी, नदी की मिट्टी निकालकर खेतों में डालने के लिए ले जाई गई। यही नहीं यह मिट्टी खोदने के लिए शासन से अनुमति लेनी चाहिए थी। बावजूद इसके न तो अनुमति ली गई और न ही शासन के मानक को पूरा किया गया। छह से सात फिट के गहरे गड्ढे खोदे गए जिसमें पानी आने के बाद यह जानलेवा साबित हो रहे हैं।
महीने भर पहले हिसामपुर में नहर में जेसीबी से किए गए गड्ढे में दो बच्चे डूब गए थे। इसमें गांव के राजकुमार सरोज पुत्र शिवरतन व मंटू पुत्र राम किशोर शामिल हैं। इसके बाद संग्रामगढ़ के मुरैनी में खेत में मिट्टी डालने के लिए गड्ढा बनाया गया था। इसमें गांव के करन पुत्र हरिश्चंद्र की डूबने से मौत हो गई थी। यही नहीं अभी 22 जुलाई को बकुलाही में बने गड्ढे में अवसानगंज के दो लड़के भोला पुत्र राम लखन व करन पुत्र मनोज की डूबने से मौत हो गई थी। इसके बाद ऐंधा गांव में रवी निर्मल जेसीबी से बने एक गड्ढे में डूब गया था। इससे उसकी मौत हो गई थी। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन को जेसीबी से खोदे गए इन गड्ढों की जानकारी नहीं थी। अगर थी तो इन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अवैध खनन होने के बाद जेसीबी संचालकों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। गड्ढे जेसीबी से और भी खोदे गए थे लेकिन इन पर अभी प्रशासन की नजर नहीं पड़ी क्योंकि इनमें अब तक कोई हादसा नहीं हुआ।