जिले में वर्षों से लागू किसान दुर्घटना सहायता योजना निरर्थक साबित हो रही है। आवेदन करने में होने वाली देरी से किसानों को योजना के लाभ से हाथ धोना पड़ रहा है। शासन ने आवेदन का समय 30 दिन का दिया है, जबकि कागजी कोरम पूरा करने में इससे अधिक समय लग जाता है। इससे पीड़ित किसान सरकारी इमदाद से वंचित रह जाते हैं। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद किसानों के खेतों में काम करते समय अंग भंग होने या सांप काटने से मौत होने पर आर्थिक मदद देता है। किसान दुर्घटना सहायता योजना के तहत कृषि कार्य के अंतर्गत उपकरणों का संचालन, बिजली उपकरणों का संचालन, कुओं की खुदाई, ट्रैक्टर से कृषि उत्पाद की ढुलाई, थ्रेसिंग करते समय अपंग और मृत्यु होने पर परिजनों की आर्थिक सहायता दी जाती है।
योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं लोगों को दिया जाता है जो तीस दिन के अंदर मंडी परिषद में आवेदन करने में सफल होते हैं। अगर तीस दिन के बाद कोई आवेदन करता है, तो वह योजना से बाहर हो जाता है। बीते वर्ष सिर्फ चार किसानों को ही योजना का लाभ मिला था। समय सीमा का निर्धारण होने से घटना के शिकार किसानों को लाभ नहीं मिल पाता है। दरअसल में तीस दिन के अंदर आवेदन करना आवश्यक होता है, जबकि घटना के शिकार किसानों के परिजनों को कागजी कोरम पूरा करने में इससे अधिक समय लग जाता है। इससे अधिकांश किसानों को योजना का लाभ नहीं मिलता है।
कब और कितना मिलेगा लाभ
छोटी उंगली की क्षति होने पर 3,000
एक हाथ की दो उंगली की क्षति
होने पर 12,000
अंगूठे की क्षति होने पर 18,000
एक हाथ की तीन उंगलियों की
क्षति होने पर 20,000
एक हाथ की चार उंगलियों की
क्षति होने पर 28,000
एक हाथ, एक पैर, एक आंख की
क्षति होने पर 30,000
किसान के दोनों पैर, दोनों हाथ,
दोनों आंख या कोई दो की क्षति
होने पर 60,000
दुर्घटना से मृत्यु होेने की दशा में 2,00,000