किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर मिलने वाले अनुदान में विभागीय अधिकारियों ने खेल कर दिया। विभाग को लक्ष्य, बजट, पात्र किसान मिलने के बाद भी अनुदान की राशि उन्हें देने के बजाय विभाग को वापस कर दी गई है। विभाग ने ऐसा क्यों किया, इसका कोई ठोस तर्क अफसरों के पास नहीं है। मगर बेचारे किसान अभी भी उम्मीद लगाकर विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विभाग अनुदान पर कृषि यंत्र मुहैया कराता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के तहत रोटावेटर, थ्रेसर, सीडड्रिल और लेजरलैंड लेबलर की खरीद पर 35 हजार से 1.5 लाख रुपये तक अनुदान देती है।
पूर्व के वर्षों में विभाग से किसानों को ऑफलाइन अनुदान दिया जाता था। मगर बीते वित्तीय वर्ष में योजना को ऑनलाइन कर दिया गया। इस योजना में व्यवस्था यह थी कि जो किसान ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराएंगे उनको अनुदान का लाभ ऑनलाइन दिया जाएगा। कहने का आशय है कि आवेदन तो ऑफलाइन करना होगा, मगर अनुदान की राशि सीधे किसान के खाते में भेज दी जाएगी। खास बात यह रही कि आवेदन करने वाले किसानों से अफसर कह रहे थे कि अनुदान पाने के लिए किसी भी कर्मचारी को एक रुपये नहीं दीजिएगा। मगर, आलम यह था कि सत्यापन में सब कुछ ठीक-ठाक मिलने पर सभी कृषि यंत्रों पर सुविधा शुल्क का मानक तय कर दिया गया था। आरोप है कि जो किसान सुविधा शुल्क के मानक पर खरे उतरे, उन्हें तो अनुदान की रकम मिल गई, मगर जो अफसर की बात मानकर चल रहे थे वे ताकते ही रह गए।