किसानों की फसल बर्बाद करने के बाद भी प्रकृति का कलेजा ठंडा नहीं हुआ। एक बार फिर रविवार को आसमान से किसानों के कलेजे पर पानी की बूंदे तेजाब की तरह टपकीं। दो दिन से खराब मौसम देख किसान खेत में बचीखुची गेहूं की फसल आननफानन समेटने व माड़ने में जुटे रहे। बूंदाबांदी से किसानों में दहशत रही। मौसमविद देशराम मीना के मुताबिक अगले दो दिन तक मौसम में सुधार की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने बारिश होने का भी अनुमान लगाया है।
तेज हवा के साथ दो दिन से जिले का मौसम अचानक फिर खराब हो गया है।
आसमान में छाए काले बादलों की मोटी परत देख किसान दहशत में हैं। रविवार को सुबह होते ही खेतों में किसान क्षमता से अधिक मेहनत करते नजर आए। पूर्व में बेमौसम बारिश से बर्बाद होने के बाद बची फसलों को तेजी के साथ वह समेटते रहे। दोपहर बाद आसमान से तेजाब बन पानी की बूंदे टपकने लगी। खेत में पड़े गेहूं के बोझ सिर पर रखे सुरक्षित स्थान के लिए मजदूर भागते रहे। पहले की बारिश से खेत में गिर कर बर्बाद हुई गेहूं की फसल की कटाई का काम भी तेजी से चलता रहा। उधर, जिनकी फसल दरवाजे पर या खलिहान में थी, वे ट्रैक्टर बुला मड़ाई कार्य में बेहद फुर्ती से जुटे रहे।
देर शाम तक मौसम साफ नहीं हुआ। इससे किसानों में बची फसल बर्बाद होने की काफी दहशत रही। सुबह का न्यूनतम तापमान 24.0 और अधिकतम 30.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। बादल और बूंदाबांदी की वजह से दोपहर के समय मौसम में नमी बढ़ गई। सुबह मौसम में 23 प्रतिशत नमी रही जबकि दोपहर के वक्त बूंदाबंदी के कारण नमी बढ़ कर 56 प्रतिशत हो गई। नमी बढ़ने व बूंदाबांदी से गेहूं की सूखी फसल मुलायम हो गई। किसान मिथलेश सिंह व रूपापुर के मनोज शुक्ल एवं ओझला के मनोहर सिंह कहते हैं कि गेहूं का डांठ नम हो जाने से अब मड़ाई में दिक्कत होगी। थ्रेसर में गेहूं लिपट जाएगा। मौसम न खुला तो मड़ाई कार्य प्रभावित होना तय है।