आफत बनकर किसानों के खेत में हुई बारिश से जिले के 83 हजार 582 हेक्टेयर भूमि की फसल मिट्टी में मिल गई। देर शाम शासन को भेजी गई रिपोर्ट में प्रशासन ने उन खेतों की पूरी फसल नष्ट होने का दावा किया है। प्रभावित किसानों की आर्थिक मदद के लिए अनुमानित रकम की मांग भी सरकार से की गई है।
बेमौसम बारिश का कहर इस कदर बरपा कि जिले के हजारों किसानों की फसलें खेत में ही सड़ गईं। स्थिति यह है कि अब उनमें से दाना तो दूर तिनका भर भूसा मिलना भी मुश्किल है। जो फसल पूर्व की बारिश से बची थी वह इधर दो दिन में हुई बरसात ले डूबी। बर्बाद हो चुके किसानों की नष्ट फसलों की रिपोर्ट के लिए सोमवार को बैठक बुलाई गई थी। मंगलवार को डीएम अमृत त्रिपाठी ने जिले की फसलों का सर्वे कराया। इस कार्य में लगभग 125 अधिकारी और कर्मचारी लगाए गए। डीएम खुद सीडीओ मनीषकुमार वर्मा और अपर जिलाधिकारी पुनीत शुक्ल के साथ कुंडा और लालगंज तहसीलों में पहुंचे।
सर्वे में जो रिपोर्ट आई वह पूर्व की रिपोर्ट से काफी अलग थी। 50 फीसदी से ज्यादा फसलों का नुकसान होना पाया गया। देर शाम चौपट हुई फसलों से प्रभावित किसानों की दशा की रिपोर्ट डीएम ने शासन को भेजी। उन्होंने सरकार को बताया है कि जिले में कुल 1 लाख 60 हजार 965 हेक्टेयर खेत में फसलें बोई गई थीं। इनमें गेहूं, आलू, सरसों, चना, मटर जैसी अन्य फसलें शामिल हैं। इसमें से 83 हजार 582 हेक्टेयर की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। इसमें से अब किसानों को अन्न का एक दाना भी मिल पाना मुश्किल है।
बाली तो सड़ी ही गेहूं के पौध मड़ाई लायक भी नहीं बचे। जिससे मवेशियों के लिए भूसे का भी संकट होगा। प्रभावित किसानों की मदद के लिए सरकार से उन्होंने आर्थिक सहायता की सिफारिश की। जिन किसानों की फसल नष्ट हुई है उनकी मदद के लिए उन्होंने शासन से कुल 85 करोड़ 80 लाख 6000 रुपए की मांग की है। इस तरह प्रशासन की रिपोर्ट से तकरीबन 50 प्रतिशत फसलों के नष्ट होने की बात सामने आई है।