कृषि विभाग के मुखिया उप निदेशक के अवकाश पर रहने के कारण विभागीय अधिकारी और कर्मचारी मनमानी पर उतर आए हैं। अफसरों की लापरवाही का आलम यह रहा कि किसानों को रोटावेटर और पंपसेट पर अनुदान के लिए 34.40 लाख रुपये होने के बाद भी पात्रों को वितरित नहीं किया जा सका। रुपये का सदुपयोग करने में अक्षम रहने वाले अफसरों ने यह रकम वापस कर दी है।
कृषि विभाग में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के तहत किसानों को खेती किसानी के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कृषि यंत्रों और पंपसेट लगाने के लिए अनुदान दिया जाता है। योजना के तहत रोटावेटर की खरीद पर 35 हजार रुपये और पंपसेट लगाने के लिए दस हजार रुपये मिलते कृषि विभाग से मिलते हैं। बीते वित्तीय वर्ष में पंपसेट के लिए 392 किसानों और रोटावेटर के लिए 130 किसानों को अनुदान की राशि बांटने के लिए बजट मिला हुआ था। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो रोटावेटर के लिए लगभग 458 और पंपसेट के लिए 623 किसानों ने आवेदन किया था। कृषि विभाग ने दिसंबर माह में पहली किस्त के रूप में पंपसेट के 118 और रोटावेटर के 110 किसानों को अनुदान की राशि उनके खाते में भेज दी, मगर पंपसेट के 274 और रोटावेटर 20 किसानों को अनुदान की राशि नहीं मिली।
चयनित किसानों को अनुदान देने के लिए विभाग ने पहले सत्यापन और बाद भी कागजी कोरम पूरा कराया। इससे किसानों को जेब को भी ढीली करनी पड़ी, मगर अफसरों की लापरवाही के चलते 34.40 लाख रुपये का सदुपयोग नहीं हो सका। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के जिला समन्वयक एसके सिंह अपनी गलती मानने को तैयार नहीं हैं। वह आला अधिकारियों पर दोष मढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि समय से फाइल को मंजूरी नहीं मिलने के कारण अनुदान की राशि नहीं प्रदान की गई। उपकृषि निदेशक का प्रभार देख रहे जिला कृषि अधिकारी डीपी सिंह ने बताया कि योजना के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदारी तय की गई है, अगर कोई परेशानी थी तो उसे बताना चाहिए था।