कारगिल युद्ध के दौरान देश के लिए हंसते-हंसते अपनी जान कुर्बान करने वाले शहीद लांस नायक विजय शुक्ला के परिवार को 17 साल बाद भी वादा न पूरा होने का मलाल है। वादों के बाद भी सरकार शहीद द्वार का निर्माण नहीं करा सकी। गांव को जाने वाली सड़क क्षतिग्रस्त पड़ी है। शहीद स्मारक परिजनों ने बनवाया लेकिन रात में वहां अंधेरा रहता है।
बतादें कि बाघराय थाना क्षेत्र के पीथीपुर निवासी विजय शुक्ला सेना में लांसनायक के पद पर तैनात थे। कारगिल युद्ध के दौरान देश की सीमा में प्रवेश करने वाले आतंकवादियों व घुसपैठियों को भगाने के लिए लांस नायक विजय शुक्ला भी पीछे नहीं रहे। वे अपनी सेना के साथ घुसपैठियों से मुकाबला करते हुए 26 जुलाई 1999 को शहीद हो गए। पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो पूरा जिला गमगीन हो उठा। सरकार ने पेट्रोल पंप समेत दूसरी मांगों का भरोसा परिवार के लोगों को दिया था। पत्नी गुड़िया देवी को आर्थिक मदद के साथ ही पेट्रोल पंप भी दिया। शहीद के भाई संजय शुक्ला का कहना है कि शासन प्रशासन ने वादा किया था सड़क पर प्रवेश द्वार बनाया जाएगा जो शहीद के नाम होगा। हालांकि प्रवेश द्वार व शहीद स्थल प्रशासन ने नहीं बनवाया। परिवार के लोगों ने शहीद स्थल बनवा दिया। पत्नी गुड़िया देवी का कहना है कि प्रवेश द्वार बने और शहीद स्थल पर स्ट्रीट लाइट लगवाई जाए। क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत कराई जाए। जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी कर्नल सिंह ने बताया कि 26 जुलाई को शहीद की पत्नी गुड़िया देवी का इलाहाबाद में सम्मान होगा। शहीद विजय की चार बेटियां व एक बेटा है। पिता की शहादत पर सभी को फख्र है।