आरईएस और लघु सिंचाई के अवर अभियंता ग्राम पंचायतों के कार्यो में अब इस्टीमेट के साथ मास्टरबुक (एमबी) नहीं तैयार करा सकेंगे। मनरेगा के कार्यो में स्टीमेट और एमबी करने का अधिकार सिर्फ तकनीकी सहायकों को है। डीएम ने मानधाता के बीडीओ के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें आरईएस और लघु सिंचाई विभाग के जेई को गांव आवंटित करके विकास कार्य कराने को कहा गया था।
ग्राम पंचायतों को पांच लाख रुपये तक स्वत: कार्य कराने का अधिकार है। जबकि पांच लाख से अधिक और साढ़े सात लाख तक की कार्ययोजना पर ब्लाॅक स्तर पर नामित तकनीकी सहायकों को अधिकार दिए गए हैं। मानधाता बीडीओ ने 21 अक्तूबर को आदेश जारी करके लघु सिंचाई विभाग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता को न्याय पंचायतों का बंटवारा करते हुए कार्य कराने को कहा गया था।
डीएम के संज्ञान में मामला आते ही बीडीओ मानधाता के आदेश को निरस्त करते हुए सभी खंड विकास अधिकारियों से कहा गया है कि शासनादेश के मुताबिक ही विकास कार्यो को किया जाय। शनिवार को डीएम का यह आदेश जारी होने पर खंड विकास अधिकारियों में खलबली मच गई। डीसी इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि स्थलीय निरीक्षण और सत्यापन के लिए दूसरे विभाग के जेई अधिकृत नहीं हैं।