भ्रष्टाचार की जांच ने जलनिगम की कमर तोड़ दी है। अभी तक सांसद और विधायक अपनी निधि का अधिकांश हिस्सा जलनिगम को ही देते थे, मगर अब एग्रो को देना पसंद कर रहे हैं। जिले की बंद 23 परियोजनाओं के लिए जिला प्रशासन और शासन स्तर से जांच की जानकारी होने के बाद एक्सईएन रुकने को तैयार नहीं हैं। चार माह के अंदर दो अधिशासी अभियंता तबादला कराकर जा चुके हैं।
जलनिगम के तत्कालीन अधिशासी अभियंता राजेश खरे, एई आरके श्रीवास्तव, सुधीर श्रीवास्तव के अनियमितता के आरोप में जेल जाने के बाद से जलनिगम में सन्नाटा पसरा हुआ है। एक समय था, जब सुबह से देर रात तक जलनिगम कार्यालय गुलजार रहता था, मगर इन दिनों विभागीय कर्मचारियों के अलावा भुगतान के लिए ठेकेदार ही भटकते नजर आते हैं। इनके सिवा कोई भी दिखाई नहीं पड़ता है।
सदर विकास खंड के पूरेरायजू समेत जिले की 23 परियोजनाओं की जांच के लिए डीएम ने जहां जिलास्तरीय कमेटी गठित की है, वहीं शासन अपने स्तर से पांच सालों के कार्यो की जांच करा रहा है। इससे जांच अधिकारी आए दिन अधिकारियों और कर्मचारियों से अभिलेखों की पूछताछ करने ऑफिस पहुंच रहे हैं। इधर जलनिगम की साख गिरने के बाद से जिले के सांसदों, विधायकों ने अपनी निधि देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। जिला प्रशासन पहले ही जलनिगम से किनारा काट चुका है।
ऐसे में वर्तमान में जलनिगम के पास कोई कार्य नहीं है।
अधिशासी अभियंता के रूप में तैनाती पाने वाले सुनील कुमार यादव ने भी अपना तबादला वाराणसी के लिए करा लिया, जबकि इसी पद पर पूर्व में तैनात रहे ओमवीर सिंह पहले ही तबादला कराकर जा चुके हैं। आलम यह है कि न तो कोई अधिकारी रहना चाहता है और न ही कोई प्रतिनिधि कोई जिम्मेदारी देना चाहता है।
जनप्रतिनिधियों ने आग्रह के बाद भी ठुकराया
जलनिगम के प्रभारी अधिशासी अभियंता आरएस वर्मा की मानें तो जनप्रतिनिधयों से संपर्क कर उन्हें विश्वास दिलाया गया कि अब किसी भी कार्य में अनियमितता की शिकायत नहीं मिलेगी। इसके बावजूद किसी भी जनप्रतिनिधि ने अपनी निधि नहीं दी है।
जिले के जनप्रतिनिधि जलनिगम को अपनी निधि देने से कतरा रहे हैं। पहले वाली स्थिति अब नहीं है। जो लोग हैं, वह जिम्मेदारी से कार्य कर रहे हैं। फिलहाल घबराने की बात नहीं है। धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा।
सुदामा प्रसाद, डीडीओ।