एनजीटी(नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के ताजा फैसले से एक बार फिर गंगा की निर्मलता-अविरलता को बनाए रखने की मुहिम को बल मिला है। केंद्र सरकार के साथ तमाम संस्थाएं इसके लिए प्रयासरत भी हैं। हालांकि इस योजना को सरकार के ही अफसर किस तरह पलीता लगा रहे हैं, इसकी बानगी जिले में देखने को मिल रही है। जिले में गंगा एक्शन प्लान के तहत होने वाले कार्यों के लिए 882.43 लाख रुपये आए। हालांकि अफसर पूरी रकम खर्च ही नहीं कर सके। वित्तीय वर्ष बीत गया और 106.24 लाख रुपये विभाग के पास ही बचे रह गए। जो रकम खर्च हुई उससे भी महज दिखावे के ही काम कराए गए।
नमामि गंगे योजना को सफल बनाने के लिए जिले में गंगा एक्शन प्लान योजना प्रारंभ की गई है। गंगा की धारा को अविरल बनाने के लिए प्रारंभ की गई इस योजना के तहत बीते वित्तीय वर्ष में 882.43 लाख रुपये मिले थे। इससे गंगा के किनारे बसे 18 ग्राम पंचायतों के 26 राजस्व गांवों के प्रत्येक घरों में शौचालय बनाने, गांव से निकलने वाले नालों की धारा मोड़ने, गंगा घाटों पर साफ-सफाई का काम होना था। जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय की लापरवाही का आलम यह रहा कि गंगा को अविरल बनाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसके चलते बीते वित्तीय वर्ष में मात्र शौचालय बनाने में 776.19 रुपये खर्च हो गए। कागज पर तो यह शौचालय बन गए, मगर वास्तविकता इससे अलग है। अधिकांश गांव ऐसे हैं, जहां अभी शौचालय के लिए गड्ढे ही नहीं खोदे गए हैं। विभाग का दावा है कि गांव में कोई भी व्यक्ति खुले में शौच नहीं जाता है। फिलहाल विभागीय अधिकारियों के अंधाधुंध खर्च करने के बाद भी 106.24 लाख रुपये बचे हुए हैं।
दो ब्लाक के 26 राजस्व गांवों के लिए है योजना
जिले के कालाकांकर और कुंडा ब्लाक के 18 ग्राम पंचायत और 26 राजस्व गांवों के लिए गंगा एक्शन प्लान योजना बनाई गई है। कालाकांकर से प्रारंभ होने वाली प्रतापगढ़ की सीमा कुंडा ब्लाक के समसपुर गांव तक है। लगभग 20 किमी के दायरे में फैले इन गांवों की गंदगी रोकने के लिए योजना थी, मगर जिला प्रशासन कोई ठोस रणनीति नहीं बना सका। इससे योजना निरर्थक साबित हुई।