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नोटबंदी का असर ः एक महीने में अरबों की चोट

Fri, 09 Dec 2016 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट बंद करने के 30 दिन बीत जाने के बाद भी हालात सामान्य नहीं हो सके हैं। बैंकों से अभी भी नकदी नहीं मिला पा रही है। लोग परेशान हैं। नगदी के संकट ने इस एक महीने में व्यापार की कमर तोड़ दी है। अकेले प्रतापगढ़ में ही अरबों की चोट पहुंची है। रेडीमेड, सराफा, ट्रांसपोर्ट, ऑटोमोबाइल्स और गल्ला व्यापार को तगड़ा झटका लगा है। रेस्टोरेंट, लोहा, आंवला, राशन, खाद्य तेल, मशीनरी और बर्तन की बिक्री पर भी व्यापक असर पड़ा है।
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8 नवंबर की शाम को हजार और पांच सौ की नोट बंद करने का एलान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालात सामान्य होने के लिए लोगों से पचास दिन का समय मांगा था। आज 30 दिन बीत गए हैं, लेकिन अभी भी हालात बदतर हैं। शहरों से ज्यादा संकट ग्रामीण इलाकों में है। व्यवसाय जगत से लेकर आम आदमी की नींद उड़ गई है। नोटबंदी के बाद पहले रुपये जमा करने और अब रुपये प्राप्त करने के लिए बैकों में पूरा दिन गंवाना पड़ रहा है। महीने भर बाद भी न एटीएम में भीड़ कम हुई और न ही रुपये की मांग पूरी हुई। एटीएम से दो हजार रुपये लेने के लिए ग्राहक रात-दिन एक कर दे रहे हैं। आधी रात से लाइन में खडे़ होने वाले लोगों को पांच-पांच घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। आरबीआई ने ग्राहकों को प्रति सप्ताह 24,000 रुपये निकालने की छूट दी है, जबकि बैंकों से सिर्फ चार-चार हजार रुपये दिए जा रहे हैं। ऐसे में लोगों की समस्याएं कम नहीं हो पा रही हैं। नोटबंदी से वैसे तो हर व्यक्ति प्रभावित हुआ है, मगर सबसे तगड़ा झटका व्यवसाय को लगा है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों, रेस्टोरेंट, लोहा, रेडीमेट, ट्रांसपोर्ट, सराफा, आंवला, राशन, खाद्य तेल, मशीनरी और बर्तन की बिक्री 70 फीसदी तक प्रभावित हुई है। व्यापारियों का मानना है कि 30 प्रतिशत जो बिक्री हो रही है, वह सिर्फ सहालग के चलते है। पंद्रह दिसंबर के बाद यह बिक्री भी घट जाएगी।
नोटबंदी से सोना और चांदी के दाम में गिरावट होने के बाद भी खरीदारी पर कोई असर नहीं पड़ा है। जिले में सहालग के महीने में करीब 80 करोड़ में रुपये का व्यवसाय होता था जो मात्र बीस प्रतिशत में सिमट कर रह गया है। रेडीमेट कपड़ों की बिक्री इस माह में खूब होती थी। ठंड की दस्तक और सहालग के कारण बाजार पर लोगों की नजरें टिकी होती थी। मगर नोटबंदी ने व्यापारियों   की कमर तोड़ दी है। एक अनुमान के अनुसार एक माह में लगभग एक अरब रुपये की बिक्री होती थी। नोटबंदी के बाद बीते एक माह में मात्र पांच करोड़ की बिक्री बताई जा रही है।
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व्यापार मंडल के अध्यक्ष और रेडीमेट कपड़ों के व्यवसायी मंजीत सिंह छाबड़ा ने बताया कि एक माह में लगभग 95 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। नोटबंदी से ट्रांसपोर्ट को भी काफी नुकसान हुआ है। प्रतिमाह लगभग 70 करोड़ रुपये का ट्रांसपोर्ट का कारोबार होता था, जो अब दस करोड़ में ही व्यवसाय सिमट गया है। ट्रांसपोर्टर आशुतोष पांडेय ने बताया कि नोटंबंदी के बाद लगभग 60 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जिले में वनस्पति घी, रिफाइंड और सरसों तेल के थोक विक्रेता राजेंद्र अग्रवाल की मानें तो एक माह में बिक्री 30 फीसदी ही हुई है। 70 फीसदी नुकसान झेलना पड़ा है। इससे जिले भर में एक माह में लगभग 73 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जिले में प्रतिदिन लगभग 65 टन लोहा की बिक्री होती थी। मगर नोटबंदी के बाद पांच प्रतिशत पर आ गई है। इससे माह भर में लगभग 95 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अगर देखा जाए तो नोटबंदी के बाद सबसे अधिक नुकसान लोहा के व्यवसाईयों को उठाना पड़ा है।  
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