जो कर रहा हूं, अपनी मर्जी से कर रहा हूं
मृतक अनिल की जेब से पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला। जिसमें लिखा था कि मैं जो कर रहा हूं, अपनी मर्जी से कर रहा हूं। मां रोना मत, मैं एक अच्छा इंसान नहीं बन पाया। मेरी प्यारी बहना स्नेहा को पढ़ाना। मां रोना मत, इतने दिन के लिए आया था- राधे-राधे। दो हजार रुपये बल्लू चाचा का और छह हजार रुपये मामा के उधार हैं।
पढ़ाई को लेकर रहता था तनाव में
चाचा दयाशंकर यादव ने बताया कि अनिल दो बहनों के बीच इकलौता था। उसकी छोटी बहन आस्था बीए और स्नेहा हाईस्कूल में पढ़ रही है। अनिल पढ़ाई को लेकर तनाव में रहता था। अभी रक्षाबंधन पर घर आया था। इसके बाद फिर प्रयागराज चला गया था।
पेड़ के पास मिला जूता और बैग
जिस आम के पेड़ से अनिल ने फांसी लगाई थी, उसके नीचे उसका बैग और जूता मिला। तलाशी के दौरान उसकी जेब से कॉलेज का आईकार्ड, मोबाइल मिला। बैग में टैबलेट, प्रतियोगी परीक्षा के नोट्स व पुस्तकें मिली हैं। ऐसा लग रहा था कि प्रयागराज से निकलते समय ही उसने खुदकुुशी की तैयारी कर ली थी। कोहड़ौर स्टेशन पर वह सरयू एक्सप्रेस से उतरा था। उसकी मौत को लेकर संदेह जताते हुए परिजनों ने पोस्टमार्टम कराया। रिपोर्ट में भी मौत का कारण खुदकुशी बताई गई।