बगैर मान्यता के चलने वाले स्कूलों को चिह्नित करने में खंड शिक्षा अधिकारियों ने व्यापक खेल किया है। अभिभावकों का आरोप है कि सेटिंग वाले स्कूलों का नाम बीईओ ने सूची में शामिल ही नहीं किया है। शनिवार को ‘अमर उजाला’ समाचार पत्र में बगैर मान्यता प्राप्त 331 स्कूलों की सूची प्रकाशित होने पर ऐसे दर्जनों स्कूलों का नाम सामने आया, जिन्हें मान्यता नहीं मिली हुई है और उनका नाम जिला प्रशासन की सूची में नहीं है।
जिले में कक्षा एक से आठ तक चलने वाले अवैध स्कूलों को चिह्नित करने के लिए जिलाधिकारी ने बेसिक शिक्षा विभाग के खंड शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी थी। जिले के 17 विकास खंडों में तैनात बीईओ ने व्यापक स्तर पर खेल किया है। उदाहरण के लिए लक्ष्मणपुर विकासखंड में तैनात तत्कालीन खंड विकास अधिकारी अच्छेलाल गुप्ता ने 9 मार्च को बीएसए कार्यालय अवैध स्कूलों की सूची भेजी जिसमें मात्र दो स्कूलों का नाम था। इसी बीच उनको मुख्यालय का बीईओ बना दिया गया। जिला समन्वयक अर्जुन सिंह को लक्ष्मणपुर बीईओ का प्रभार सौंपा गया। 03 मई को प्रभारी बीईओ ने 33 बगैर मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची बीएसए कार्यालय उपलब्ध कराई है। ऐसा ही कुछ खेल सदर विकास खंड की बीईओ शालिनी श्रीवास्तव ने किया है।
बीईओ कार्यालय से 26 स्कूलों को नोटिस भेजी गई है जबकि बीएसए कार्यालय भेजी गई सूची में मात्र 15 स्कूलों का नाम शामिल है। अवैध स्कूलों को चिह्नित करने में सबसे अधिक खेल बेलखरनाथधाम, मंगरौरा, पट्टी बाबागंज में हुआ है। बीईओ ने बेलखरनाथधाम और बाबागंज में तीन-तीन अवैध स्कूल दिखाए गए हैं, जबकि मंगरौरा में मात्र छह स्कूलों का नाम शामिल किया गया है। फिलहाल खंड शिक्षा अधिकारियों के इस खेल का खुलासा एसडीएम के नेतृत्व में गठित टीम करेगी। बीएसए एसटी हुसैन ने बताया कि एसडीएम की जांच में अगर अधिक स्कूल मिलते हैं, तो खंड शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।