इस बार धनतेरस या दीपावली पर अगर चांदी के पुराने सिक्के खरीदने की सोच रहे हों तो सावधानी बरतें। महारानी विक्टोरिया और किंग जार्ज वाले सिक्के बाजार से लगभग गायब हो चुके हैं। कुछ ही दुकानों पर यह मौजूद हैं। उधर नकली सिक्कों की बाजार में भरमार है। शहर के मार्केट में पुराने सिक्कों की कीमत 1350 से 1450 रुपये के बीच है, वह भी मुश्किल से उपलब्ध हो रहे हैं।
दरअसल दीपावली पर असली चांदी के सिक्के पर गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा रखकर पूजा करने की मान्यता है। लोग इसलिए पुराने सिक्के खरीदने की ज्यादा कोशिश करते हैं। धनतेरस और दीपावली पर इन सिक्कों की मांग भी बढ़ जाती है। मांग की अपेक्षा आपूर्ति कम होने के कारण इन सिक्कों की कीमत भी सराफ अपने ढंग से तय करते हैं। चूंकि महारानी विक्टोरिया के सिक्के सन 1901 और किंग जार्ज के सिक्के सन 1919 के हैं। इसलिए लोगों को विश्वास है कि यह असली चांदी के सिक्के हैं। मगर धनतेरस और दीपावली पर इन सिक्कों की मांग अधिक होने के कारण ज्यादातर सराफ हूबहू नकली सिक्के बाजार में उतार देते हैं।
पहचान न होने के कारण ग्राहक इनके जाल में फंस जाते हैं। नाम न छापने की शर्त पर कुछ दुकानदारों ने बताया कि बाजार में जितने सिक्कों की मांग होती है उतने उपलब्ध ही नहीं होते। आम आदमी खरीदने के बाद फिर उसे बाजार में वापस नहीं करता। इसलिए पुराने सिक्के बाजार में कहां से इतनी मात्रा में आएंगे कि लोगों की मांग पूरी की जा सके। इसलिए नकली सिक्के बाजार में धड़ल्ले से बिकते हैं।
असली सिक्कों की इस तरह करें पहचान
n चांदी के असली सिक्के दिखने में कुछ धुंधले होते हैं। इन पर लिखे अक्षर भी छोटे होते हैं लेकिन पढ़ने में स्पष्ट रहते हैं। इनकी आवाज खनकदार होती है।
n महारानी विक्टोरिया के सिक्कों पर महारानी के चेहरे के चारों ओर वीआईसीटीओआरआईए-ईएमपीआरईएसएस लिखा होता है जबकि दूसरी ओर वन रूपी और 1901 लिखा होता है। कुछ सिक्कों में उर्दू में भी एक रुपये लिखा होता है।
n किंग जार्ज के सिक्कों में चेहरे के चारों ओर जीईओआरजीईवी-ईएमपीईआरओआर लिखा होता है जबकि दूसरी ओर वन रूपी इंडिया 1919 लिखा होता है।
महारानी विक्टोरिया काल के सिक्के बाजार से लगभग खत्म हो चुके हैं। लिहाजा डुप्लीकेट सिक्के तैयार किए गए हैं जो विक्टोरिया काल के सिक्कों से ज्यादा आकर्षक हैं। उन्हें चांदी के वजन के हिसाब से बेचा जा रहा है। अब तो लक्ष्मी गणेश के सिक्के प्रचलन में आ गए हैं।
प्रहलाद खंडेलवाल, ज्वैलर्स, श्याम बिहारी गली।