जिले के किसान गेहूं की बोआई कैसे करें, उन्हें मांग के अनुरूप डीएपी नहीं मिल पा रही है। शुक्रवार को जिले में 1368 मीट्रिक टन की रैक आई, मगर इससे किसानों की मांग पूरी नहीं हो पा रही है। जिला प्रशासन ने 2736 मीट्रिक टन डीएपी की मांग की थी, मगर शासन से मांग की आधी डीएपी मिली है। जिले के 125 साधन सहकारी समितियों को नौ-नौ टन डीएपी भेजी गई है, जिले के 47 समितियों को अभी खाद के लिए इंतजार करना होगा।
गेहूं की बोआई के लिए डीएपी की मांग बढ़ गई है। किसान इन दिनों बीज और खाद की तलाश कर रहे हैं ताकि खेत में फसलों की बोआई कर सकें। कृषि विभाग के बिक्री केंद्रों से गेहूं का बीज किसानों को मिल जा रहा है, मगर डीएपी के लिए संकट बना हुआ है। जिन समितियों में खाद पहुंची है, वहां सोमवार से वितरण होना है। पारदर्शिता बरतने के लिए सभी समितियों को नोडल अधिकारियों और पुलिस की तैनाती की गई है। जिनकी देखरेख में सचिव खाद का वितरण करेंगे।
1368 मीट्रिक टन डीएपी का है इंतजार
जिले में अगर 1368 मीट्रिक टन डीएपी का आवंटन और मिल जाता, तो काफी हद तक खाद का संकट खत्म हो जाता। हालांकि जिला प्रशासन का प्रयास जारी है। अगर जिले में डीएपी की दूसरी रैक नहीं आई तो किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल अफसरों का दावा है कि इसी माह के अंत तक दूसरी रैक आएगी।
-
जिले को 1368 मीट्रिक टन डीएपी मिली है। जिले की 125 साधन सहकारी समितियों को नौ-नौ टन डीएपी भेजी गई है। जिन 47 समितियों को खाद नहीं मिली हैं, उन्हें अक्तूबर माह में डीएपी दी गई थी। इसी माह के अंत तक दूसरी रैक आने की संभावना है।
- नरेंद्र यादव, सहाय निबंधक, सहकारिता